Singhngarh Kila: छत्तीसगढ़, जिसे रहस्यों और परंपराओं की भूमि कहा जाता है, अपने हर कोने में इतिहास के अंश समेटे हुए है। इन्हीं रहस्यमय स्थलों में से एक है सिंघनगढ़ का किला, जो बलौदाबाजार जिले के घने जंगलों के बीच स्थित है। यह किला इतना गहराई में छिपा है कि यहां तक पहुंचने के लिए बारनवापारा वन क्षेत्र से लगभग 4 किलोमीटर अंदर पहाड़ी रास्ते पर चढ़ाई करनी पड़ती है।
सिंघनगढ़ का किला न केवल पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय लोककथाओं और रहस्यमय घटनाओं के कारण भी प्रसिद्ध है। स्थानीय लोग इसे भूतिया स्थल मानते हैं, जबकि कुछ इतिहासकार इसे गोंड शासक सिंधना धुर्वा की राजधानी बताते हैं।

सिंघनगढ़ किले का इतिहास
कहा जाता है कि सिंघनगढ़ किला कई सदियों पुराना है। इसका निर्माण उस समय हुआ जब गोंड जनजातियां इस क्षेत्र पर शासन करती थीं। इस किले से जुड़ा सबसे प्रमुख नाम है — राजा सिंधना धुर्वा, जो अपनी वीरता और प्रशासनिक कुशलता के लिए प्रसिद्ध थे। माना जाता है कि किले का नाम “सिंधना” से ही “सिंघनगढ़” पड़ा।

पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि यह किला 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच बनाया गया होगा। उस समय गोंड साम्राज्य मध्य भारत में अपनी शक्ति के चरम पर था। किले की स्थिति यह दर्शाती है कि इसे रणनीतिक सुरक्षा के उद्देश्य से बनाया गया था, ताकि बाहरी आक्रमणों से राज्य की रक्षा की जा सके।
राजा सिंधना धुर्वा का निवास स्थल
किले में प्रवेश करते ही लगभग 17 से 18 फीट ऊंचा भव्य प्रवेश द्वार दिखाई देता है। यह द्वार किले की विशालता और स्थापत्य कला का प्रतीक है। खास बात यह है कि किले की दीवारें पत्थरों को बिना किसी जोड़ाई (mortar) के एक-दूसरे के ऊपर रखकर बनाई गई हैं, जो प्राचीन निर्माण तकनीक का अद्भुत उदाहरण है।
द्वार और दीवारों पर की गई बारीक नक्काशी से यह स्पष्ट होता है कि उस समय पत्थरकारी कला कितनी उन्नत थी। किले के भीतर कई छोटे-बड़े कमरे, जलस्रोत और सुरंगनुमा रास्ते भी बताए जाते हैं, जिनका अब केवल अवशेष ही बचे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह किला राजा सिंधना धुर्वा का निवास स्थल था, जहां से वे आसपास के क्षेत्रों पर शासन करते थे। कहा जाता है कि किले के भीतर गुप्त मार्ग भी हैं, जो जंगलों और नदियों तक पहुंचते हैं।
Singhngarh Kila: भूतों का निवास
सिंघनगढ़ किले को लेकर कई रहस्यमय कहानियां प्रचलित हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यह स्थान आत्मिक शक्तियों से जुड़ा हुआ है। कई लोगों का दावा है कि रात के समय यहां से अजीब आवाजें और रोशनी दिखाई देती हैं।
वहीं, इतिहासकारों का कहना है कि यह किला किसी प्राचीन युद्ध या राजवंश के पतन का साक्षी रहा होगा, जिसके बाद इसे त्याग दिया गया। जंगलों से घिरा यह स्थान धीरे-धीरे वीरान हो गया और लोगों ने इसे रहस्यमय या भूतिया मानना शुरू कर दिया।
कहा जाता है कि राजा सिंधना धुर्वा की मृत्यु के बाद किले पर कई बार हमले हुए। युद्ध के दौरान कई सैनिकों की मृत्यु यहीं हुई थी। संभवतः इन्हीं घटनाओं के कारण यह स्थान आज तक रहस्य से घिरा हुआ है।

इतिहास का मूक गवाह
Singhngarh Kila: आज यह किला अपने वैभवशाली अतीत की मूक गवाही दे रहा है। पत्थरों से बने अवशेष अब भी उस दौर की झलक दिखाते हैं, जब यहां गोंड राजाओं की सत्ता थी।
पर्यटन की दृष्टि से यह किला अभी भी काफी अनछुआ और अज्ञात स्थल है। यहां पहुंचने के लिए घने जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे यह अनुभव एक रोमांचक यात्रा बन जाता है।
राज्य सरकार और पुरातत्व विभाग ने इस क्षेत्र में पुरातात्विक सर्वेक्षण और संरक्षण कार्यों की योजना बनाई है, ताकि आने वाली पीढ़ियां छत्तीसगढ़ के इस गौरवशाली इतिहास को जान सकें।

