बैतूल जिले के सारनी क्षेत्र में स्थित मठारदेव मंदिर लगभग 300 वर्ष पुराना धार्मिक स्थल है। यह मंदिर सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला की एक 3000 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना है और अपनी आध्यात्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है।

Mathardev Temple: ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता मंदिर
किंवदंती के अनुसार, करीब तीन शताब्दी पहले श्री बाबा मठारदेवजी ने इस पर्वत शिखर पर स्थित एक गुफा में भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी।
‘मठाधीश’ का आशीर्वाद प्रदान किया

लंबी साधना और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन दिए और ‘मठाधीश’ का आशीर्वाद प्रदान किया। माना जाता है कि इस वरदान के बाद बाबा मठारदेवजी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने में समर्थ हो गए।
प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र

समय के साथ यह स्थान श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थ बन गया, जहां दूर-दूर से भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति और आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं।
इस मंदिर का वातावरण प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर है। सतपुड़ा के मनोहारी दृश्य, हरी-भरी पहाड़ियां और शांति से घिरा यह स्थल धार्मिक यात्रा के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।
शिवरात्रि पर बड़ी संख्या में एकत्र होते भक्त
Mathardev Temple: मठारदेव मंदिर से जुड़ी आस्था इतनी गहरी है कि यहां आने वाले भक्त विशेष अवसरों और शिवरात्रि पर बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं। इन धार्मिक आयोजनों में दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं, जिससे यह स्थल सामाजिक और सांस्कृतिक मेलजोल का माध्यम भी बन जाता है।

