Garh Kundar Fort: मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक और भव्य किलों की कोई कमी नहीं है, लेकिन निवाड़ी जिले में स्थित गढ़कुंडार किला अपने रहस्यमयी स्वरूप और अनसुलझे रहस्यों के कारण खास पहचान रखता है।

यह किला जितना ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है
उतना ही रहस्य और रोमांच से भरा हुआ भी है।
गढ़कुंडार किला ओरछा से लगभग 70 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव की ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह 5 मंजिला किला है, जिसमें 3 मंजिलें ज़मीन के ऊपर और 2 मंजिलें ज़मीन के नीचे बनी हुई हैं। इसे कभी जिनागढ़ के महल के नाम से भी जाना जाता था।
कहते हैं कि यह किला इतना रहस्यमयी है कि यह दूर से तो दिखाई देता है,

लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति पास पहुंचता है, तो रास्ते भ्रमित करने लगते हैं और
किला अचानक गायब हो जाता है।
यहां तक कि दिन में भी इस किले के अंदर अंधेरा रहता है, जो इसे और भी भयावह बना देता है। इस कारण कई लोग इसे भूल-भुलैय्यां किला भी कहते हैं।
इतिहासकारों के अनुसार,
गढ़कुंडार किला करीब 1100 साल पुराना है…

और इसे चंदेल वंश के राजा यशोवर्मन ने 9वीं सदी में बनवाया था।
यह किला सुरक्षा के लिहाज से बेहद सुदृढ़ था और इसकी दीवारें इतनी ऊंची व मजबूत थीं कि कोई आसानी से इसे पार नहीं कर सकता था। किले में मौजूद सुरंगों के बारे में कहा जाता है कि…
ये दूर-दूर के शहरों तक जाती थीं, जिनका इस्तेमाल युद्ध के समय या आपात स्थिति में किया जाता था।
गढ़कुंडार किले से जुड़ी एक और चौंकाने वाली घटना के अनुसार, एक बार गांव में एक बारात आई थी…
जो किले के बेसमेंट में चली गई और उसके बाद कभी नहीं लौटी।

करीब 70 लोगों की यह बारात आज तक लापता मानी जाती है।
इसी के बाद किले के नीचे जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि रात में किले से अजीब और डरावनी आवाजें सुनाई देती हैं, जिससे इसका रहस्य और भी गहरा हो जाता है।
गढ़कुंडार किला सिर्फ रहस्यों के लिए ही नहीं, बल्कि इसके अंदर छिपे खजाने के लिए भी जाना जाता है।
कहा जाता है कि इस किले में इतना खजाना छिपा है कि अगर मिल जाए, तो पूरा देश अमीर बन सकता है।
चंदेल, बुंदेल और खंगार वंश के शासकों ने इस किले से शासन किया और यही वजह है कि यह स्थान आज भी इतिहासकारों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
कैसे पहुंचे गढ़कुंडार किला:
गढ़कुंडार किला सड़क, रेल और हवाई मार्ग से पहुंचा जा सकता है।
निकटतम हवाई अड्डा ग्वालियर है, जहां से टैक्सी या कैब से किले तक पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन दतिया है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा किला करीब है।
गढ़कुंडार किला आज भी इतिहास, रहस्य और रोमांच के प्रेमियों के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है।

