Avoid These Mistakes in Ganesh Puja: भारत में हर साल बड़े धूमधाम से गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी की शुरुआत भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि से शुरु होकर दस दिनों तक यह त्योहार चलता रहता है। यह धार्मिक आस्था का प्रतीक है। लोग इस पर्व में भगवान गणेश की प्रतिमा को अपने घर, ऑफिस, पर लेकर आते हैं। वैसे तो भगवान गणेश बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते है, लेकिन उतनी ही जल्दी वो नाराज भी हो सकते हैं। इसलिए उनकी पूजा करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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आइए जानते हैं, गणपत्ति की पूजा करते समय किन चीजों को नहीं चढ़ाना चाहिए –
तुलसी की पत्ती…
शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश को तुलसी चढ़ाना वर्जित है, कहा जाता है कि एक बार भगवान गणेश नदी किनारें बैठकर तपस्या कर रहें थे, तभी तुलसी वहां से गुजरी और भगवान गणेश को देखकर मोहित हो गई और उनसे विवाह करने की इच्छा जताई , लेकिन भगवान ने उसे ठुकरा दिया तो तुलसी ने उन्हें श्राप दे दिया तभी बप्पा ने भी उन्हें श्राप दे दिया तभी से तुलसी नहीं चढ़ती।

केतकी के फूल है वर्जित…
भगवान गणेश को केतकी का फूल नहीं चढ़ाया जाता और यह फूल भगवान शंकर को भी नहीं चढ़ाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रम्हा जी ने इस फूल का सहारा लेकर झूठ बोला था, तभी से यह फूल भगवान गणेश और शंकर को भी नहीं चढ़ाया जाता है।
सफेद वस्त्र और सफेद चंदन…
गणपति बप्पा को सफेद रंग की वस्तुएं जैसे सफेद चंदन, सफेद फूल भगवान गणेश को अर्पित नहीं की जाती क्योकि भगवान गणेश को सफेद रंग अप्रिय होती होता है। कथा के अनुसार, एक बार चंद्रमा ने भगवान गणेश के स्वरुप का मजाक उड़ाया था, तभी से बप्पा ने सफेद रंग का त्याग कर दिया था।
सफेद रंग का जनेऊ भी है वर्जित…
पूजा करते समय भगवान गणेश को जनेऊ चढ़ाने की परंपरा है, लेकिन ध्यान रहे कि उन्हें सफेद रंग का जनेऊ नहीं चढ़ाया जाता बल्कि उन्हें लाल सूत्र को जनेऊ के रुप में चढ़ाया जाता है।

टूटे और सूखे चावल भूलकर भी न करें अर्पित…
पूजा करते समय अक्षत का विशेष महत्व है, लेकिन ये अक्षत पूर्ण, स्वच्छ और बिना टूटे हुए होने चाहिए। क्योकि सूखे और टूटे चावल अशुद्ध माने जाते हैं। इसलिए इन्हें भगवान गणेश को अर्पित करना मना होता है।
छोटी सी गलती बप्पा को कर सकती है नाराज…
वैसे तो भगवान गणेश बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन वो जितनी जल्दी प्रसन्न होते हैं उतनी ही जल्दी नाराज भी हो जाते है, इसलिए उनकी पूजा करते समय शास्त्रों में लिखे नियमों का भी पालन करें। इससे न केवल पूजा सफल होती है बल्कि भगवान गणेश का आर्शीवाद भी मिलता है।
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