Samaleshwari Mata Temple Raipur: राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती इलाके में मां महामाया देवी मंदिर है, जहां माता आदि शक्तिपीठ के रुप में विराजमान हैं। कहा जाता है, इस मंदिर का निर्माण हैहयवंशी के राजा ने सन 1482 में करावाया था, जिसका प्रमाण संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा तैयार किए गए गजट में भी मिलता है, मंदिर परिसर में ही समलेश्वरी माता विराजमान हैं, जिनकी महिमा और कथा दोनों बेहद रोचक है।
कैसे प्रकट हुई मां समलेश्वरी देवी…
पौराणिक कथा के अनुसार, मां समलेश्वरी संबलपुर (उड़ीसा) क्षेत्र की कुलदेवी हैं। पटनागढ़ के राजा ने जब अपने छोटे भाई को संबलपुर में शासन के लिए भेजा, तब मां ने उन्हें सपने में दर्शन दिए और सपने में उनसे कहा कि वो सिमली पेड़ के नीचे विराजमान हैं।

जब राजा उस पेड़ के पास देखने गए, तो वहीं पर माता प्रकट हुई और वहीं राजा ने माता की मंदिर बनाई और उनको प्रतिष्ठित कराया। इसी वजह से उनका नाम समलेश्वरी पड़ा और क्षेत्र का नाम संबलपुर रखा गया।
रायपुर में पूजा पद्धति की शुरुआत…
छत्तीसगढ़ के हैहयवंशी राजाओं ने जब संबलपुर जाकर मां समलेश्वरी की पूजा देखी, वो उससे काफी प्रभावित हुएं। इसके बाद उन्होंने रायपुर के महामाया मंदिर परिसर में ही समलेश्वरी माता की एक माता की अलग प्रतिमा प्रतिष्ठित करावाई। इस प्रकार रायपुर में भी मां समलेश्वरी की पूजा आरंभ हुई और यह मंदिर भक्तों की आस्था का क्रेंद्र बन गया।

पुरातत्व विभाक का सर्वेक्षण…
छत्तीसगढ़ पुरातत्व विभाग के सर्वेक्षण के अनुसार, समलेश्वरी माता मंदिर 8वीं शताब्दी से पहले का है। इस हिसाब से मंदिर लगभग लगभग 1400 वर्ष पुराना है। मंदिर की दीवारों और खंभों पर बने भित्तिचित्र आज भी प्राचीन का और स्थापत्य का प्रमाण देते हैं।
मंदिर की विशेषताएं और रहस्य…
यह मंदिर 16 खंभो पर टिका हुआ है, जिसे जगमोहन परिसर भी कहा जाता है, यहां मां समलेश्वरी पूर्वाभिमुख विराजमान है। इस मंदिर का गुंबद भी आकर्षण का केंद्र हैं, इसमें विशेष प्रकार के यंत्र बने हुए हैं।

बताया जाता है कि, चैत्र नवरात्रि के समय सूर्य की पहली किरणें सीधे मां समलेश्वरीके चरणों पर पड़ती हैं। यह अद्भुत दृश्य प्राचीन वास्तुशिल्प की महानता को दर्शाते है, साथ ही यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। इस मंदिर में बहुत से रहस्य छिपे हैं, जो भक्तों को अलौकिक अनुभव कराते हैं।
भक्तों की आस्था…
भक्तों का मानना है कि मां समलेश्वरी से सच्चे दिल से जो भी मांगो वो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। और असंभव कामों को भी संभव कर देती हैं। यही कारण है कि यह मंदिर छत्तीसगढ़ और उड़ीसा ही नहीं बल्कि पूरे भारत में आस्था और चमत्कार का केंद्र माना जाता है।

