Radha Rani Temple MP: हिंदु धर्म में हर महिने कोई न कोई त्योहार आता है और सभी लोग हर त्योहार को काफी धूम – धाम से मनाते हैं। 31 अगस्त यानि की आज राधा रानी का जन्मदिन है, जिसे राधाष्टमी के रुप में मनाते है। ऐसे में आपको मध्यप्रदेश में स्थित राधारानी का एक बेहद प्राचीन और अनोखे मंदिर के बारे में बताया जाता है, जो कि विदिशा के नंदवाना इलाके के वृंदावन गली में स्थित है।
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इस मंदिर में क्या है खास…
इस मंदिर की खास बात यह है कि, इस मंदिर का पट पूरे 364 दिन बाद खोला जाता है, यानि की इस मंदिर के पट साल में एक बार ही खोले जाते हैं। वो भी राधाष्टमी के दिन, इस दिन भक्ति की काफी भीड़ उमड़ती है।

क्या है मंदिर का इतिहास…
यह मंदिर लगभग 400 साल पुराना मंदिर है, जो मूल रुप से वृंदावन का है। बता दें कि, ये प्रतिमाएं 1669 से पहले वृंदावन में यमुना जी के किनारे राधा रंगी राय नाम से मंदिर में स्थापित थी। लेकिन फिर जब इस मंदिर पर आक्रमण हुआ तो वहां के पुजारी और पूर्वजो ने राधारानी की प्रतिमा छिपाकर वहां से आएं और प्रतिमा को विदिशा ले आएं।

वृंदावन से क्यों लाई गई प्रतिमा..
बताया जाता है कि, औरंगजेब के हमलों से बचाने के लिए राधा रानी की प्रतिमा वृंदावन से यहां लाई गई थी। तभी से ही राधा रानी का पट साल में सिर्फ एक बार ही खुलता है, और सुबह 12 बजे से लेकर दूसरे दिन की शाम तक खुला रहता है। तब से ही यह परंपरा चली आ रही है। राधा रानी बाकी दिन गुप्त रुप से पूजा की जाती है।

राधाष्टमी के दिन भक्त रखते हैं आधे दिन का व्रत..
शास्त्रो के अनुसार, कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद ही राधाष्टमी मनाई जाती है, इस दिन भक्त आधे दिन का व्रत रहते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, राधा रानी का जन्म अष्टमी तिथी के अर्धदिवस में हुआ था, इसलिए इस दिन आधे दिन का व्रत रखा जाता है। जो भी श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं। वो दोपहर के बाद पूजा करते है फिर अपना व्रत खोल लेते हैं।
राधा – कृष्ण की साथ पूजा करने से मिलती है कृपा..
राधाष्टमी के दिन राधा रानी और कृष्णजी की साथ में पूजा की जाती है। मान्यता है कि राधा रानी श्री कृष्ण को बहुत प्रिय हैं। इसलिए दोनों की साथ पूजा की जाती हैं।

मान्यता है कि राधाष्टमी के दिन सच्चे दिल से व्रत और पूजन करते हैं। फिर राधा रानी और श्री कृष्ण का आर्शीवाद लेते हैं। आपको बता दें कि राधा – कृष्ण को प्रेम का प्रतीक भी कहा जाता है। इसलिए दोनों की साथ पूजा की जाती हैं। सच्ची श्रद्धा के साथ पूजा करने से प्रेम, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

