भगवान गणेश को आमतौर पर अकेले ही विघ्नहर्ता, बुद्धि प्रदाता और शुभारंभ के देवता के रूप में पूजा जाता है। उनकी प्रतिमाएं अधिकतर अकेली मिलती हैं, जिनमें उनके साथ केवल उनका वाहन मूषक होता है। परंतु मध्यप्रदेश के सागर जिला पुरातत्व संग्रहालय में भगवान गणेश की एक अत्यंत दुर्लभ और अद्भुत प्रतिमा स्थापित है, जिसमें वे स्त्री रूप ‘विनायकी’ के साथ विराजमान हैं।
Ganesh Sculpture: स्त्री रूप ‘विनायकी’ के साथ विराजमान हैं
यह विशेष प्रतिमा लगभग 800 वर्ष पुरानी मानी जाती है, जो 13वीं शताब्दी की है। इसमें गणेश जी ‘विनायक’ और उनकी शक्ति स्वरूपा ‘विनायकी’ के साथ ललितासन मुद्रा में विराजमान हैं।
ललितासन एक विशेष योगिक आसन है जिसमें एक पैर मोड़ा होता है और दूसरा नीचे लटकता है, जो पद्मासन का ही एक प्रकार है।
प्रतिमा में विनायक चतुर्भुजी हैं,
अर्थात्…. उनके चार भुजाएं हैं, जिनमें आयुध, आभूषण और मोदक हैं। वहीं, विनायकी की दो भुजाएं हैं और वे विनायक के साथ प्रणय मुद्रा में हैं।
Ganesh Sculpture: नारी शक्ति की प्रतिष्ठा का प्रतीक भी है

पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि..
जिस तरह भगवान शिव की शक्ति पार्वती मानी जाती हैं, उसी तरह गणेश जी की शक्ति स्वरूपा विनायकी हैं। यह प्रतिमा सागर जिले के पिठौरिया गांव, जो बांदरी के पास स्थित है, वहां से लाई गई थी। यह केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा में नारी शक्ति की प्रतिष्ठा का प्रतीक भी है।
Ganesh Sculpture: 64 योगिनियों में से एक माना जाता

विनायकी का उल्लेख देवी शक्तियों में ….
अष्टमातृकाओं और 64 योगिनियों में से एक माना जाता है।
‘गणेशानी’ या ‘गजाननी’ नाम से भी उनकी पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,,,,
विनायकी रूप भगवान गणेश ने राक्षस अंधक का वध करने के लिए धारण किया था। इस राक्षस को पराजित करने की विशेष शर्त थी कि उसका रक्त धरती पर न गिरे। तब गणेश जी ने स्त्री रूप में विनायकी का अवतार लिया और अपनी सूंड से सारा रक्त एक बार में खींच लिया, जिससे उसका संहार संभव हो सका। यह रूप स्त्री शक्ति की महत्ता को स्थापित करने वाला भी है।
Ganesh Sculpture: स्त्री शक्ति की महत्ता को स्थापित करने वाला भी है

गणेश जी की प्रतिमाएं पूरे भारतवर्ष में पाई जाती हैं और यह विविधता देश की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। चाहे वह उत्तर भारत हो या दक्षिण भारत, गणेश प्रतिमाएं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में मौजूद हैं।
नृत्यरत गणेश की प्रतिमाएं,
मूषक के साथ या विविध मुद्राओं में बनी गणेश मूर्तियां,
सभी में उनकी सूंड की विशेषता प्रमुख होती है।
प्राचीन मूर्तियों में गणेश जी की सूंड अर्धगोलाकार, ऊपर की ओर उठी या पूरी तरह गोलाकार भी मिलती है।
Ganesh Sculpture: रक्षा और ज्ञान की समरसता का सुंदर उदाहरण है
सागर संग्रहालय की यह दुर्लभ प्रतिमा न केवल कला और आस्था का प्रतीक है,
बल्कि…
यह दर्शाती है कि.
भारतीय संस्कृति में स्त्री और पुरुष शक्तियों को समान रूप से पूजनीय माना गया है। गणेश जी का यह स्त्री रूप, विनायकी, शक्ति, रक्षा और ज्ञान की समरसता का सुंदर उदाहरण है…

