Chhattisgarh Ganesh Temple: गणेश चतुर्थी के अवसर भारत के हर हिस्से में गणपति का आगमन होता है। घर – घर और मंदिरों में गणेश प्रतिमाएं विराजमान हैं। इन्हीं श्रद्धा और आस्था के बीच हम आपको छत्तीसगढ़ के बलोद जिले में स्थित अनोखे मंदिर के बारे में बताएंगे। यहां भगवान गणेश की आधी प्रतिमा जमीन में धसी हुई है।
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क्या है मान्यता…
स्थानीय लोग बताते है कि यह प्रतिमा पहले बहुत छोटी थी, हर साल यह प्रतिमा धीरे – धीरे बढ़ती जाती है। बताया जाता है बालोद जिले के मरारपारा में स्थित यह मंदिर लगभग 100 साल पुरानी है। यहां विराजमान प्रतिमा स्वंय जमीन फाड़कर प्रकट हुई थी। इसी वजह से इस मंदिरो को “जमीन फोड़ गणेश मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है।

सपने में बप्पा ने दिए थे अपने आने के संकेत…
स्थानीय लोग बताते हैं कि, करीब एक सदी पहले बाफना परिवार के एक सदस्य के सपने में भगवान गणेश ने दर्शन दिए। उसके बाद ही स्व. सुल्तानमल बाफना और भोमराज श्रीमाल ने जमीन के प्रकट हुई प्रतिमा को देखा और चारों ओर टीन शेड लगाकर एक छोटा – सा मंदिर बनवाया। धीरे – धीरे श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ी और मंदिर में भीड़ होने लगी ऐसे ही मंदिर का विस्तार होता गया।
बढ़ते आकार के कारण ऊंची बनाई गई छत…
श्रद्धालुओं का कहना है कि गणेश जी की प्रतिमा जमीन से धीरे – धीरे ऊपर उठ रही है और उसका आकार समय – समय पर बढ़ता रहता है। यही कारण है कि मंदिर का निर्माँ करते समय उसकी छत को पहले से ज्यादा ऊंचा रखा गया । कई बार प्रतिमा के आकार बढ़ने से जमीन में दरारें भी देखी गई हैं।

आधा हिस्सा आज ही भी जमीन में है धसा…
गणेश जी की परतिमा का घुटनों तक का हिस्सा आज भी जमीन के अंदर है, श्रद्धालुओं का मानना है कि प्रतिमा का शेष हिस्सा आने वाले समय में धीरे – धीरे प्रकट हो सकता है। वर्तमान समय में प्रतिमा विशाल स्वरुप धारण कर चुकी है और दूर दराज से भक्त यहां भगवान के दर्शन करने आते हैं।
यहां दर्शन करने से होती है संतान की प्राप्ति!
इस मंदिर की मान्यता है कि, जो भी नि:संतान दंपत्ति पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करते है और भगवान से संतान की कामना करते हैं, तो उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि यह मंदिर मनोकामना पूर्ति स्थल के रुप में भी जाना जाता है।

