Brihaspativar Vrat Rules and Story: भारत एक ऐसा देश है जहां हिंदू संस्कृति में हफ्ते के सातो दिन किसी न किसी देवी या देवताओं का दिन होता है, इसमें से गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पतिदेव को समर्पित है। इस दिन कई भक्त भगवान विष्णु, बृहस्पति भगवान के लिए व्रत रखते है। साथ ही साथ पूजा के दौरान कथा पढ़ना या सुनना काफी शुभ माना जाता है।
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कैसे करें व्रत जाने नियम
मान्यता है कि अगर लगातार 7 गुरुवार व्रत रखते हैं तो आपके कुंडली का गुरु दोष खत्म हो सकता है। और इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
- व्रत की शुरुआत तब करनी चाहिए जब गुरुवार अनुराधा नक्षत्र के दिन पड़े, उस दिन से व्रत की शुरुआत करना शुभ माना जाता है।
- व्रत के दिन पीले वस्त्र पहने, पीले फूल और गुड़ चने का भगवान को भोग लगाएं। गुरुवार के दिन पीली चीजे भगवान को अर्पित करना चाहिए।
- कथा सुनने के बाद प्रसाद और चरणामृत भगवान को चढ़ाए फिर परिवार और कथा सुनने वाले में बांट दें।

क्या है कथा?
एक नगर में एक व्यापारी था, जो बहुत अमीर था, वो विदेश में रहकर पैसे कमाता और दान धर्म भी करता लेकिन उसकी पत्नी बहुत कंजूस थी तो एक दिन बृहस्पतिदेव साधु का भेष धारण करके उसके घर पहुंचे और भिक्षा मांगी। लेकिन व्यापारी की पत्नी ने दान करने की जगह उनसे संपत्ति नष्ट करने का उपाय पूछा क्योकि वो किसी को दान नहीं देना चाहती थी।
साधु ने व्यापारी की पत्नी को दिया सुझाव
साधु ने कहा कि- ‘यदि तुम धन नष्ट करना चाहती हो तो गुरुवार के दिन घर में गोबर से पुताई करना, पीली मिट्टी से बाल धोनाा और कपड़े धोना, मांस -मदिरा का सेव न करना’
व्यापारी की पत्नी ने साधु के बताए अनुसार काम किया और व्यापारी का कमाया सारा धन खत्म हो गया, कुछ दिन बाद व्यापारी के पत्नी की मौत हो गई।
व्यापारी राजा से हुआ रंक
जब व्यापारी विदेश से लौटा तब सब बर्बाद हो गया वह अपनी बेटी के साथ दूसरे नगर में चला गया और लकड़ी बेचकर गुजारा करने लगा। एक दिन बेटी ने दही खाने की इच्छा जताई लेकिन व्यापारी के पास पैसे नहीं थे, तो व्यापारी रोने लगा। ऐसे में भगवान बृहस्पति भेष बदलकर आएं और व्यापारी को व्रत करने की सलाह दी।

व्रत का मिला फल
व्यापारी ने सच्चे मन से व्रत रखा उसकी कठिनाईयां दूर होने लगी। लेकिन एक गुरवार को व्यापरी व्रत रहना भूल गया उसके बाद राजा ने व्यापारी को खाने पर बुलाया अचानक रानी का हार गायब हो गया, जिसकी वजह से व्यापारी पर चोरी का सक हुआ और व्यापारी को बेटी के साथ कारागार में डाल दिया।
कारगार में किया व्रत
व्यापारी ने जेल के अंदर ही व्रत रखा कहीं से चने गुड़ का जुगाड़कर भगवान को भोग लगाया और पूजा की और वहीं प्रसाद लोगों में बांटा तो वहां मौजूद एक महिला के बेटे की मृत्यु हो गई ती लेकिन प्रसाद खाते ही वह जीवीत हो गया।
राजा के सपने में भगवान ने बताया व्यापरी को निर्दोष?
राजा के सपने में भगवान वृहस्पति ने दर्शन दिया और राजा से कहा व्यापारी को छोड़ दो वो निर्दोष है, हार उसी खूंटी पर है, जहां रानी ने पहले रखा था, जब राजा ने देखा हार मिल गया फिर राजा ने सम्मान पूर्वक व्यापारी को रिहा कर दिया। उसके बाद व्यापारी की किसमत बदल गई फिर उसने बेटी का विवाह बहुत धूम-धाम से कराया।

