Bade Dongar Kondagaon: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में स्थित बड़े डोंगर की पहाड़ी न केवल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, बल्कि यह ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। लोकमान्यता है कि यहीं मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। आज भी इस पहाड़ी पर शेर के पंजों, भैंसे के सींग और माता के पदचिन्ह जैसी आकृतियां देखी जा सकती हैं, जिन्हें लोग आस्था का प्रमाण मानते हैं।
मां दुर्गा ने क्यों किया था महिषासुर का वध?
हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णन मिलता है कि महिषासुर नामक राक्षस ने कठोर तप करके भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था कि कोई भी देवता उसका वध नहीं कर सकेगा। इस वरदान के बाद महिषासुर ने स्वर्गलोक पर आक्रमण कर देवताओं को परास्त कर दिया।

जब समस्त देवता परेशान हुए तो उन्होंने अपनी शक्तियों को मिलाकर मां दुर्गा की रचना की। मां दुर्गा ने महिषासुर से भयंकर युद्ध किया और अंततः उसका वध कर दिया। लोक मान्यताओं के अनुसार, यह युद्धभूमि छत्तीसगढ़ का बड़ा डोंगर ही था। इस कथा के कारण यह स्थल आज भी आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है।
बड़े डोंगर का धार्मिक महत्व
बड़े डोंगर की पहाड़ी को शक्ति और भक्ति का स्थल माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु मां दुर्गा के पदचिन्ह, शेर के पंजों और भैंसे के सींग जैसी प्राकृतिक आकृतियों को देखकर भाव-विभोर हो जाते हैं। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह स्थल देवी की अद्भुत शक्ति का प्रमाण है।

आदिवासी संस्कृति से जुड़ाव
यह स्थान आदिवासी संस्कृति और परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। बस्तर की प्रसिद्ध दशहरा परंपरा बड़े डोंगर में भी देखने को मिलती है। आदिवासी समाज के लिए यह स्थान देवी की आराधना और लोक परंपराओं का संगम है।

Bade Dongar Kondagaon: मंदिर का इतिहास
बड़े डोंगर सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।यह कभी बस्तर राज्य की राजधानी रहा। महाराजा पुरुषोत्तम देव के शासनकाल में बड़े डोंगर को राजधानी बनाया गया था। यहां के पुरातात्विक अवशेष आज भी इस गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं।

माना जाता है कि इस क्षेत्र का इतिहास इससे भी प्राचीन है। बड़े डोंगर के आसपास फैले अवशेष और शिलालेख बताते हैं कि यह स्थान लंबे समय से धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है
बड़े डोंगर तक कैसे पहुंचे?
- बड़े डोंगर, कोंडागांव जिले में स्थित है।
- यह जगदलपुर से लगभग 55 किलोमीटर दूर है।
- यहां पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे उपयुक्त है।
- जगदलपुर और कोंडागांव से बस और टैक्सी की सुविधा उपलब्ध रहती है।

