MahaLaxmi Mandir MP: इंदौर के राजवाड़ा क्षेत्र में स्थित है बेहद प्राचीन महलक्ष्मी मंदिर है, यह मंदिर होलकर राजवंश के शासन काल से जुड़ा एक धार्मिक स्थल है। इस मंदिर का निर्माण साल 1832 में मल्हार राव होल्कर द्वितीय ने बनावाया था। यहां दिवाली के समय में भक्तो की काफी भीड़ होती है। और दीपावली के दिन भव्य आयोजन किए जाते हैं।
क्या है विशेष?
यह मंदिर होलकर रियासत का एक बहुत महत्वपूर्ण प्रतीक है, बताया जाता है, जब भी होलकर शासन का खजाना खोलना होता था, तब राजा पहले इस मंदिर में भगवान के दर्शन करने आते थे। उसके बाद ही अपने खजाने को खोलते थे।

कब हुई मंदिर की स्थापना?
इंदौर के राजवाड़ा क्षेत्र में स्थित प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर होलकर राजवंश का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। लगभग 190 साल पहले, 1832 में इस मंदिर को मल्हार राव होलकर (द्वितीय) द्वारा बनवाया गया था।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व होलकर रियासत से जुड़ा है—शासक खजाना खोलने से पहले इस मंदिर में दर्शन करने आते थे। यह मंदिर धार्मिक आस्था का ही नहीं बल्कि वास्तुकला में मराठा शैली की लकड़ी द्वारा की गई कारीगारि को भी दर्शाता है।
क्या है मान्यता?

यहां माता का तीन बार श्रृंगार किया जाता है। एक बार सुबह 7 बजे, फिर दोपहर 12 बजे और शाम 5 बजे। यह मंदिर अपनी विशेष मान्यताओं और दीपावली के भव्य उत्सवों के लिए प्रसिद्ध है, जहां भक्त कमल पुष्प से पूजन कर धन-समृद्धि की मन्नत मांगते हैं। मान्यताओं में कमल फूल अर्पित करने, व्यापार वृद्धि और सुख-समृद्धि की कामना शामिल है। एक अनोखी परंपरा है चावल का हिस्सा मन्नत के रूप में ले जाना और तिजोरी में रखना, जो धन-धान्य का प्रतीक है।
एक अनूठी परंपरा के अनुसार, भक्त अपने सपनों का घर या कोई भी मनोकामना जैसे बाइक, संतान या विवाह के लिए प्रतीकात्मक मॉडल माताजी को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से उनकी इच्छाएं शीघ्र पूरी होती हैं। मंदिर में कई ऐसी प्रतिकृतियां रखी गई हैं, जो भक्तों की पूर्ण हुई मनोकामनाओं की गवाही देती हैं।

