Tale Wali Mata Ka Mandir: आमतौर पर लोग मंदिरों में अपनी किस्मत का ताला खोलने की मन्नत मांगते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में बेतवा नदी के किनारे स्थित ‘ताले वाली माता’ मंदिर एकदम अनोखा है। यहां श्रद्धालु अपने दुश्मनों की चालों को बंद करने के लिए ताला जड़ते हैं।
बता दें कि इस मंदिर में ‘ताले वाली माता’ के पास मेरी माता और कुल्लू माता भी विराजमान हैं।
क्या है मान्यता?
भक्त बताते हैं कि ताले वाली माता की मंदिर में दूर – दूर से श्रद्धालु आते हैं और अपने दुश्मनों की चाल को बंद करने उनके षडयंत्र पर पानी फेरने के लिए यहां ताला लगाते है। इस मंदिर में बेरी का पेंड है, जिसमें लोग अपने दुश्मन का नाम लेकर ताला लगाते हैं। और उसकी चाबी ‘ताले वाली माता’ के सामने रख देते है, कहा जाता है ऐसा करने से माता रानी दुश्मनों द्वारा चली गई हर चाल को फेल कर देती है। आपके घर में सुख और शांति बनी रहती है।

कैसे हुई ताले लगाने की परंपरा?
स्थानीय निवासी बताते हैं कि करीब 30 साल पहले मंदिर में लगे बेरी के पेड़ के नीचे देवी मां की मूर्ति स्वंय प्रकट हुई। तब यहां भक्तों ने ताला लगाकर मन्नत मांगनी शुरु कर दी तो भक्तों की मन्नत पूरी होने लगी, तब से यहां ताला लगाकर मन्नत मांगने की परंपरा शुरु हो गई।
इस दिन उमड़ती है भीड़
मंदिर में विशेष तौर पर शनिवार, मंगलवार और गुरुवार के दिन सैकड़ों लोग विदिशा, भोपाल, सागर जैसे इलाकों से आते हैं। और वो अपने दुश्मन का नाम लेकर बेरी के पेड़ या जंजीर पर ताला लगाते हैं, और चाबी मां के चरणों में रख देते हैं।मान्यता है कि इससे माता दुश्मनों को कमजोर करती हैं और भक्तों की किस्मत के ताले खोल देती हैं।
लोग यहां कचहरी में चल रहे जमीनी विवाद को सुलझाने की मन्नत लेकर भी माता के दरबार आते हैं।

