Nagalsar Village: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ा एक अनोखा प्रयास शुरू हुआ है। जगदलपुर के पास कांगेर घाटी नेशनल पार्क क्षेत्र में एक ऐसा गांव तैयार किया जा रहा है, जो पूरी तरह ईको-फ्रेंडली होगा। इस गांव का नाम है नागलसर, और यह राज्य का पहला पर्यावरण अनुकूल गांव बनने जा रहा है।
नागलसर गांव को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यहां की हर चीज़ प्रकृति के अनुरूप हो। गांव में न कोई शोर होगा, न प्रदूषण — सिर्फ प्रकृति की आवाजें, पक्षियों की चहचहाहट और झरनों की सरसराहट सुनाई देगी। यह गांव न सिर्फ पर्यावरण संतुलन की मिसाल बनेगा, बल्कि आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक जीवनशैली का बेहतरीन संगम भी होगा।

मिट्टी, लकड़ी और बांस से बने घर
Nagalsar Village: नागलसर के घर पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनों से बनाए जा रहे हैं। दीवारें मिट्टी और लकड़ी की होंगी, जबकि छतें और सजावट में बांस का उपयोग किया जाएगा। इन घरों में आधुनिक सुविधाएं भी मौजूद होंगी, जिससे ग्रामीणों को सुविधा और पर्यावरण — दोनों का संतुलन मिल सके।
गांव में प्लास्टिक और केमिकल उत्पादों के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। इसके स्थान पर प्राकृतिक और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री का उपयोग होगा।
ऊर्जा की जरूरतें पूरी करने के लिए सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जाएगा। साथ ही वर्षा जल संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि गांव आत्मनिर्भर और टिकाऊ बने।

पर्यावरण संतुलन और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा
नागलसर को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि यह गांव आने वाले समय में ईको-टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बन सके। गांव के आसपास फैले घने जंगल, झरने और पहाड़ियां पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगी। यहां ईको-टूरिज्म ट्रेल तैयार की जा रही है, जिससे पर्यटक प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले सकें और स्थानीय संस्कृति से रूबरू हों।
इस पहल का उद्देश्य न केवल प्रकृति संरक्षण है, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना भी है। पर्यटकों के आगमन से गांव के युवाओं को गाइड, हॉस्पिटैलिटी और हस्तशिल्प बिक्री जैसे क्षेत्रों में काम मिलेगा।
Read More: छत्तीसगढ़ में अब हर दुकान के लिए ट्रेड लाइसेंस अनिवार्य, गुमटी से लेकर मॉल तक लागू नया नियम
Nagalsar Village: ‘प्रकृति के साथ जीवन’ की नई परिभाषा
नागलसर गांव छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है कि कैसे विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं। यहां की योजना इस विचार पर आधारित है कि “प्रकृति के साथ जीवन ही सच्चा विकास है।”
गांव में साइकिल और ई-वाहनों का ही उपयोग होगा ताकि प्रदूषण न फैले। यह मॉडल आने वाले समय में अन्य ग्रामीण इलाकों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

