हिंदू पौराणिक कथाओं में पाताल लोक को राक्षसों और नागों का निवास स्थान माना जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक ऐसा स्थान मौजूद है जिसे वास्तव में “पाताललोक” कहा जाता है। यह अनोखी जगह तामिया क्षेत्र में स्थित है और इसे पातालकोट घाटी के नाम से जाना जाता है।
Patalkot Hidden India: इस घाटी में 12 गांव बसे हुए हैं

करीब 3000 फीट गहराई में बसी इस घाटी में 12 गांव बसे हुए हैं, जहां लगभग 2000 से अधिक भारिया और गोंड जनजातियों के लोग रहते हैं।
यह इलाका चारों ओर से घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां के गांव आपस में 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।
सिर्फ 2 घंटे दिखती है धूप

Patalkot Hidden India: पातालकोट की सबसे खास बात यह है कि यहां के कुछ गांव ऐसे स्थान पर बसे हैं जहां सूरज की रोशनी बहुत मुश्किल से पहुंचती है।
इनमें से तीन गांव तो ऐसे हैं जहां पर पूरे दिन में केवल 2 घंटे ही धूप निकलती है, जबकि बाकी समय क्षेत्र में शाम जैसा माहौल बना रहता है।
घाटी की गहराई और पहाड़ों के घेरे के कारण यहां रोशनी सीमित रूप से पहुंचती है…
रामायणकाल से जुड़ा इतिहास

Patalkot Hidden India:पातालकोट की जड़ें रामायण काल से जुड़ी हुई मानी जाती हैं।
मान्यता है कि रावण का पुत्र मेघनाथ यहां भगवान शिव की तपस्या करने आया था। जब हनुमान जी को इस बात का पता चला तो उन्होंने यहां पहुंचकर उसकी तपस्या भंग कर दी।
एक अन्य किवदंती के अनुसार, यहीं पर सीता माता पृथ्वी में समा गई थीं, जिससे एक गहरी गुफा बन गई और तभी से इस स्थान को पाताललोक कहा जाने लगा।
Patalkot Hidden India: आदिवासी संस्कृति और धार्मिक मान्यताएं
यहां रहने वाले आदिवासी समुदाय, विशेषकर भारिया जनजाति, मेघनाथ का बहुत सम्मान करते हैं। हर साल मार्च-अप्रैल में चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर एक भव्य मेला लगता है।
स्थानीय लोग भगवान शिव,
अग्नि और सूर्य देव की पूजा करते हैं।
यहां की संस्कृति आज भी बाहरी दुनिया से काफी अलग और परंपरागत है।
Patalkot Hidden India: औषधियों का खजाना
पातालकोट को केवल उसकी रहस्यमय बनावट के लिए नहीं…
, बल्कि इसकी औषधीय संपदा के लिए भी जाना जाता है।
यहां कई प्रकार की जड़ी-बूटियां, दुर्लभ पेड़-पौधे, जानवर और पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं।
यह घाटी दूधी नदी के जल पर निर्भर है, जो यहां के लोगों के लिए जीवन रेखा का काम करती है।
घूमने का सही समय
पातालकोट की यात्रा का सबसे अच्छा समय मानसून और सर्दियों का होता है।
जुलाई से सितंबर तक का मौसम घाटी को ऊपर से देखने के लिए उपयुक्त है, जबकि अक्टूबर से फरवरी के बीच घाटी के अंदरूनी हिस्सों की खोज करने का सही समय होता है। मानसून के दौरान यहां की हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है…
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