Ganesh Vehicle Mouse Story: भारत में हर साल बड़े धूमधाम से गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी की शुरुआत भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि से शुरु होकर दस दिनों तक यह त्योहार चलता रहता है। यह धार्मिक आस्था का प्रतीक है। और इस बार गणेश उत्सव की शुरुआत 27 अगस्त हो चुकी है। चारो तरफ गणेश उत्सव की धूम है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि – “आखिर गणेश जी की सवारी एक छोटा सा चूहा कैसे बना। आइए बताते है इसके पीछे की पौराणिक कथाएं है।
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आखिर कैसे बना मूषक गणपति की सवारी…
गणपति बप्पा का मूषक का सवारी बनने के पीछे बहुत ही रोचक कथाएं हैं एक पौराणिक कथा के अनुसार,
गजमुखासुर नाम के दैत्य ने देवताओं को किया था परेशान…
एक गजमुखासुर नाम का एक दैत्य था, वह बहुत शक्तिशाली था और अपने बल का इस्तेमाल करके उसने सभी देवी – देवताओं को परेशान करना शुरु कर दिया। एक दिन सभी देवी – देवता परेशान होकर भगवान गणेश की शरण में पहुंचे। भगवान गणेश को पूरी बात बताई और उनसे मदद करने का आग्रह किया।

भगवान गणेश ने किया गजमुखासुर का उद्धार…
गणपति बप्पा ने सभी देवताओं का आग्रह स्वीकर कर गजमुखासुर को मजा चखाने निकल पड़े। फिर जब गजमुखासुर वापस देवताओं को परेशान करने आया श्री गणेश सामने आ गए फिर गजमुखासुर और गणपति बप्पा के बीच युद्ध शुरु हो गया। युद्ध इतना ज्यादा बढ़ गया की। युद्ध करते – करते बप्पा का एक दांत टूट गया, जिससे भगवान गणेश क्रोधित हो गएं और उसी दांत से प्रहार करने के लिए दैत्य के पीछे भागने लगे।
गजमुखासुर बना बप्पा की सवारी…
जब भगवान गजमुखासुर के पीछे पकड़ने दौड़ने लगे तो गजमुखासुर प्रहार के डर से चूहे का रुप धारण कर लिया। और भगने लगा, तभी भगवान ने उसे पकड़ लिया। फिर गजमुखासुर मृत्यु के डर से भगवान गणेश से क्षमा मांगने लगा। यह देखकर भगवान गणेश को उस पर दया आ गई और उन्होंने दैत्य को चूहे के रुप में अपनी सवारी बनने का आर्शिवाद दिया। तभी से चूहा बप्पा की सवारी है।

एक दूसरी कथा के अनुसार…
कई लोग यह भी बताते हैं कि- एक बार इंद्रदेव ने दरबार लगाया, जिसमें क्रौंच नाम का एक गंधर्व था, जो कि काफी निर्लज्ज था, वह सभा में काफी शोर कर रहा था, अपने आप में मस्त लोगों का मजाक उड़ा रहा था। और अचानक उसने मुनि वामदेव के ऊपर पैर रख दिया, इससे ऋषि क्रोधित हो गए और उसे श्राप देते हुए कहा कि जैसे चूहा उत्पात मचाता है तेरा स्वाभाव भी ऐसा है तो जा तू चूहा बन जा।’

इसके बाद भी क्रौंच नहीं सुधरा वह चूहा बनाकर ऋषि पराशर के आश्रम में जाकर वहां बनी कुटियां तोड़ दी, वहां रखा सारा सामान फैला दिया, जिससे ऋषि परेशान हो गए और गणेश भगवान के पास पहुंच तो गणेश भगवान ने उस चूहे पर काबू पाने के लिए पाश फेक दिया, जिसमें वह चूहा फस गया। उसके बाद उसे गलती का एहसास हुआ उसने बप्पा से क्षमा मांगी भगवान ने उसका उद्धार करते हुए अपना सवारी बना लिया।

