Pratyangira Devi Temple MP: देशभर में देवी- देवताओं के कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो महाभारत और रामायणकाल से जुड़े हुएं है। ऐसे ही उज्जैन में भी एक मंदिर है, जहां माता रानी विराजमान है। उनका स्वरुप बिल्कुल नरसिंह भगवान जैसा है। यह मंदिर उज्जैन में महाकाल और मां बगलामुखी के प्रसिद्ध मंदिरों के बीच बसा हुआ है, जहां मां प्रत्यंगिरा देवी विराजमान हैं, जिनका स्वरुप नरसिंह भगवान के रुप में नजर आती हैं।
कहा जाता है कि, यहां विराजमान माता रावण और असुरों की कुलदेवी है।
कहां है मां प्रत्यंगिरा का मंदिर?
प्रत्यंगिरा माता का मंदिर उज्जैन में महाकाल बाबा और मां बगलामुखी के प्रसिद्ध मंदिरों के बीच स्थित है। यह मंदिर भैरवगढ़ रोड पर स्थित है। वैसे तो माताओं के मुख में विनम्रता, प्रेम, ममता दिखाई देती है। लेकिन प्रत्यंगिरा माता का स्वरुप बेहद अलग है। उनके चेहरे पर अकसर क्रोध नजर आता है। मां का चेहरा सिंह के जैसा है। बाकी शरीर देवी के समान ही दिखाई देता है।

तंत्र की देवी मानी जाती है मां प्रत्यंगिरा
मां प्रत्यंगिरा को तंत्र की देवी कहा जाता है। कहते हैं माता के दर्शन मात्र से शरीर की सारी निगेटिव एनर्जी दूर हो जाती है। अगर किसी ने तंत्र किया है तो उसका पता लगाया जा सकता है। मां की पूजा से अकाल मृत्यु पर विजय पाया जा सकता है।
बताया जाता है, इस मंदिर में तांत्रिक अपनी साधनाओं को सिद्ध करने के लिए रात में अनुष्ठान करते हैं।
कैसे हुआ मां प्रत्यंगिरा का अवतरण?
पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान विष्णु ने अपने हिरण्यकश्यप से अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए भगवान नरसिंह का रूप लिया था, इसके बाद उन्होंने दहलीज पर बैठकर हिरण्यकश्यप का वध किया था, लेकिन इसके बाद उनके अंदर इतना क्रोध भर गया कि वो शांत नहीं हो रहा था तब सभी देवताओं ने मां प्रत्यंगिरा का आवाहन किया। इसके बाद मां प्रत्यंगिरा प्रकट हुई और उन्होंने नरसिंह भगवान का क्रोध शांत किया।

रावणों की कुल देवी मानी जाती है मां प्रत्यंगिरा
कहा जाता है कि, मां प्रत्यंगिरा देवी निकुंबला देवी का ही एक स्वरूप है, जिनकी पूजा रावण और उसके पुत्र मेघनाद ने की थी। रामायण में मां निकुंबला देवी का भी जिक्र मिलता है।
जब रावण या उनके पुत्र किसी युद्ध में जाते तो पहले मां निकुंबला की विशेष पूजा करते थे फिर ही जाते थे।

