Amavasya December 2025: दिसंबर में पड़ने वाली अमावस्या बेहद खास होती है, इसे पौष अमावस्या कहते है, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। इस अमावस्या में पितरों तर्पण और श्राद्ध करने के लिए ये विशेष दिन माना जाता है।
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कहते है, अगर कोई भक्त पितृ दोष या काल सर्प दोष से परेशान है, तो उन भक्तों को पौष की अमावस्या का व्रत जरुर रखना चाहिए, इस दिन सुबह – सुबह किसी पवित्र नहीं , कुंड में स्नान करने का बेहद खास महत्व है।
आखिर कब है अमावस्या?
पौष मास की अमावस्या ज्यादातर दिसंबर में ही पड़ती है, इस बार ये अमावस्या 19 दिसंबर को है। अमावस्या की शुरुआत 19 दिसंबर की सुबह 5 बजे से होगी और इसका समापन 20 दिसंबर की सुबह 7.12 बजे हो जाएगा।
पौष अमावस्या क्या करना बेहद जरुरी
- किसी पवित्र नदी में स्नान करें
इस दिन पवित्र नदी जैसे जबलपुर का गौरी घाट, नर्मदा नदी और अलहाबाद की गंगा , जमुना सरस्वती के संगम में स्नान करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे कई पवित्र नदियां और जलाशय हैं, जहां आप स्नान कर सकते है, कई पवित्र कुंड है, जहां आप स्नान कर सकते हैं।
- पूर्वजो को याद करें
इस दिन अपने पितरो और पूर्वजों को याद करना चाहिए, अगर आप पितरों का तर्पण करना चाहते हैं, तो उसके लिए ये दिन अच्छा होता है।
- व्रत करें
पौष अमावस्या के दिन व्रत जरुर रखें। उस दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र जल में स्नान करें। नहाने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। याद रहे जिस पात्र से अर्घ्य देना हो उसमें शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल पुष्प अवश्य डालें।
- अमावस्या के दिन दान – पुण्य जरुर करें।
क्या है पौष अमावस्या का महत्व
धर्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष अमावस्या के दिन व्रत रखने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, साथ ही सभी देवी – देवताओं का आशीर्वाद भी मिलता है। इस दिन सुबह पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है।

