Mahishasura Mardini Temple Mp: मध्यप्रदेश के खरगोन जिले की सीमा पर विध्यांचल पर्वत के शिखर पर स्थित है मां पार्वती का प्राचीन मंदिर, यह मंदिर विंध्यवासिनी मां पार्वती माता के नाम से प्रसिद्ध हैं। यहां माता रानी की अष्टभुजा प्रतिमा विराजमान है।
कहा जाता है कि, यह वही स्थान है जहां मां दुर्गा महिषासुर का वध करने के लिए बाल स्वरुप में प्रकट हुई थी।
बहुत प्रचीन है ये मंदिर
कहा जाता है यह मंदिर बेहद प्रचीन है। इसका उल्लेख दुर्गा चलीसा और स्कंद पुराण में मिलता है। पहले यहां छोटा सा मंदिर था, जिसका जीर्णोंद्धार होलकर शासन काल में देवी अहिल्या बाई होलकर ने करवाया था। फिर धीरे – धीरे इस मंदिर का विशाल परिसर तैयार किया गया।

बताया जाता है कि, यह मंदिर विश्व का एकमात्र मंदिर हैं, जहां महिषासुर मर्दिनी मां पार्वती प्राचीन मंदिर माना जाता है, जहां माता अष्टभुजा रूप में विराजमान हैं।
मां नाराज होते ही फेर लेती है मुंह
सूत्रो के अनुसार, मंदिर की महिला पुजारन वंदना शर्मा बताती हैं कि -‘माता जाग्रत हैं, जो भी भक्त मनोकामना मांगते हैं, वह पूरी हो जाती है। यहीं नहीं अगर पूजा में कोई गलती हो जाए तो माता नाराज भी होती है। इस दौरान माता का मुंह टेढ़ा हो जाता है। माता के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं।’
3 रुपों में दर्शन देती है माता
इस मंदिर की खास बात यह है कि, यहां माता रानी पूरे दिन में 3 बार अपना रुप बदलती है। सुबह मां का स्वरुप बाल रुप में होता है। फिर दोपहर में मां अपने युवा रुप में दिखाई देती है। वहीं शाम के समय वो बुजुर्ग अवस्था में आ जाता है।

बताया जाता है कि, इस मंदिर हर रोज रात के अंधेरे में शेर माता रानी के दर्शन करने आता है।
हर मनोकामना होती हैं पूरी
विंध्यवासिनी मां पार्वती से जो भक्त सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं। और उनसे कोई कामना करते हैं तो वो जरुर पूरी होती है। इस स्थान पर विशेष रुप से नि:संतान परिजन को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
यहां भक्त दूर – दूर से अपनी मनोकामनाएं लेकर इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं।
महिषासुर के वध के लिए इस स्थान पर प्रकट हुई थी मां
स्कंद पुराण के मुताबिक, हजारों साल पहले महिषासुर नामक दानव ने आतंक मचा रखा था। उसे वरदान प्राप्त था कि उसका वध कन्या के हाथों होगा।

सभी देवताओं ने मां दुर्गा से प्रार्थना की तब मां ने कन्या का रुप लिया और इसी स्थान पर महिषासुर का वध किया है। औऱ फिर वो इसी स्थान पर विराजमान हो गई। इस घटना का जिक्र पुराणों में भी किया गया है।
यह वहीं स्थान है जहां माता दुर्गा महिषासुर का वध करने के लिए बाल स्वरुप में प्रकट हुई थी।

