Gutkeshwar Mahadev Temple: मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में भगवान भोलेनाथ का एक अनोखा मंदिर है, जहां स्वंयू महादेव विराजमान है। वहां प्रकृतिक रुप से उनका जलअभिषेक भी होता है। यह मंदिर इंदौर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवगुराडिया गांव में है। यह शिवलिंग गुफा के अंदर लगभग 20 फीट की गहराई में विराजमान है। यह मंदिर गुप्तेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।
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गरुड़ देव से जुड़ी है कथा
मान्यता के अनुसार, कहते है कि यह वहीं जगह है, जहां गरुड़ देवता ने भगवान भोलेनाथ की तपस्या की थी, जिसके बाद यहां शिव जी प्रकट हुए थे, और शिवलिंग के रुप में यही रह गए। यहां विराजमान शिवलिंग की गरुड़ देव के रुप में पूजा की जाती है। इस वजह से इस मंदिर का नाम गुटकेश्वर महादेव पड़ा जो पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है, इस स्थान को ‘गरुड़ तीर्थ’ भी कहते है।

दूसरी कथा के अनुसार
यहां की मंदिर और शिवलिंग पानी के अंदर डूब गया था। कहते है अहिल्याबाई भगवान भोलेनाथ की भक्त थी, उन्होंने फिर 18वीं शताब्दी में 1784 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। वो उस समय महेश्वर से इंदौर आई थी।
क्या है खास?
इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ का मंदिर गहराई में कहते है, यहां विराजमान मूल शिवलिंग 12 फीट ऊंचे थे, लेकिन अब वो पानी के नीचे है। मंदिर में एक शिवलिंग विराजमान है, पीछे गोमुख बना हुआ है, जिससे पानी गिरता है, जिससे यह एक चमत्कारी और आस्था का केंद्र बना हुआ है, जिसे “गुप्तेश्वर महादेव” भी कहते हैं और यह ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है।

मंदिर में रहता है नाग – नागिन का जोड़ा
इंदौर शहर से लगभग 15 किमी दूर स्थित इस मंदिर में एक नाग -नागिन का जोड़ा भी रहता है। कहते हैं यहां 5 कुंड है, जिसमें से 2 कुंड में भक्त स्नान करते हैं। कहते है इस कुंड का पानी कभी नहीं सुखता और यहां रहने वाले नाग – नागिन कभी कुंड में तो कभी शिवालय में दर्शन देते है।
मान्यता है, जो भक्त यहां मनोकामना मानते हैं, अगर उन्हें नाग – नागिन का जोड़ा दिखता है, उसकी मनोकामना जरुर पूरी होती हैं।
शिवरात्रि में लगता है मेला
सावन के समय भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। बताया जाता है, शिवरात्रि के समय यहां मेल लगता है। दूर – दूर से भक्त यहां भगवान के दर्शन करने आते हैं।

