Khajuraho Brahma Temple: मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो अपने प्राचीन और कलात्मक मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इन्हीं मंदिरों में से एक है ब्रह्मा मंदिर, जो 9वीं–10वीं सदी का एक ऐतिहासिक स्मारक है।
हालांकि इसे ब्रह्मा मंदिर कहा जाता है, पर वास्तव में यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इतिहासकारों के अनुसार, यह नामकरण एक आम भ्रांति के चलते हुआ है।

Khajuraho Brahma Temple: अद्वितीय स्थापत्य और विशेषता
ब्रह्मा मंदिर की बनावट इसे खजुराहो के अन्य मंदिरों से अलग करती है। यह मंदिर बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट से निर्मित है, जबकि खजुराहो के अधिकतर मंदिर केवल बलुआ पत्थर से बने हैं।
यह मंदिर 12 स्तंभों पर खड़ा है और इसके गर्भगृह में एक चतुर्मुखी शिवलिंग स्थापित है।

इसी चार मुख वाले शिवलिंग के कारण लोगों ने इसे “ब्रह्मा मंदिर” कहना शुरू कर दिया, जबकि यह शिवलिंग ही भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है।
इतिहासकार शंकर लाल सोनी के अनुसार…
मंदिर में स्थापित चतुर्मुखी शिवलिंग के कारण लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है,
जबकि मंदिर के प्रवेश द्वार पर विष्णु की प्रतिमा स्पष्ट रूप से उकेरी गई है, जो इसके वास्तविक देवता की पुष्टि करती है।
Khajuraho Brahma Temple: पूजा क्यों नहीं होती?
मंदिर में स्थापित शिवलिंग खंडित है, यही वजह है कि वहां कोई विधिवत पूजा नहीं होती।
श्रद्धालु यहां केवल दर्शन के लिए आते हैं। खजुराहो के कई अन्य मंदिरों की तरह ब्रह्मा मंदिर भी मूर्ति खंडन की पीड़ा झेल चुका है।
कहा जाता है कि इन मंदिरों के निर्माण में लगभग 100 वर्ष लगे थे, परंतु समय और आक्रमणों के चलते कई मूर्तियाँ और संरचनाएं नष्ट हो गईं।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

ब्रह्मा मंदिर, खजुराहो स्मारक समूह का हिस्सा है और इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है।
यह मंदिर खजूर सागर और निनोरा ताल के किनारे स्थित है, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ाता है।
खजुराहो आने वाले पर्यटक इस मंदिर को देखने अवश्य आते हैं,
Khajuraho Brahma Temple:क्योंकि यह न केवल स्थापत्य का नमूना है, बल्कि इसके पीछे छुपी कहानियाँ और रहस्य भी लोगों को आकर्षित करते हैं।
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