India Japan Relations: हाल ही में प्रधानमंत्री की जापान यात्रा के दौरान भारत और जापान के बीच कई अहम समझौते हुए। लेकिन इस कूटनीतिक यात्रा के पीछे छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर के बैलाडीला का एक ऐतिहासिक और गहरा संबंध है,
जो अब तक पर्दे के पीछे रहा है।
India Japan Relations: लोहा भारत के बस्तर की धरती से निकला है

15 अगस्त को जापान से एक खबर आई जिसने दुनिया को चौंका दिया… जापान की बुलेट ट्रेन शिनकानसेन सिर्फ 35 सेकंड देरी से पहुंची, और रेलवे प्रशासन ने न सिर्फ माफी मांगी बल्कि इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया।
यह ट्रेन, जो 300 से 600 किमी/घंटे की रफ्तार से चल सकती है…
अपने सटीक समय और सुरक्षा के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
लेकिन शायद कम ही लोग जानते हैं कि इस ट्रेन की पटरियों और पहियों में उपयोग हुआ लोहा भारत के बस्तर की धरती से निकला है।
India Japan Relations: अयस्क की आपूर्ति में कोई बाधा न आए
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की बैलाडीला खदानें दुनिया की सबसे उच्च गुणवत्ता वाली लौह-अयस्क वाली खदानों में गिनी जाती हैं। यहां 66% से अधिक शुद्धता वाला अयस्क पाया जाता है,

जो सल्फर और अन्य अशुद्धियों से मुक्त होता है।
यही अयस्क 1960 से विशाखापत्तनम के पोर्ट के माध्यम से जापान को निर्यात किया जा रहा है।
इतना ही नहीं, इस रेलमार्ग को इतने संवेदनशील रूप में देखा जाता है कि… इस पर वर्षों तक कोई यात्री ट्रेन नहीं चलाई गई, ताकि अयस्क की आपूर्ति में कोई बाधा न आए।
India Japan Relations: लाखों टन अयस्क जापान को भेजा जाने लगा
इस अयस्क के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बर्बाद हो चुके जापान को भारत ने बैलाडीला का लौह अयस्क देकर फिर से खड़ा होने में मदद की थी।
जापान के टोक्यो विश्वविद्यालय के प्रो. एउमेउरा ने सबसे पहले इस खनिज संपदा की ओर इस्पात मिलों का ध्यान आकर्षित किया और 1957 में जापान का प्रतिनिधि मंडल भारत आया।

इसके बाद 1960 में भारत-जापान के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिसके तहत हर साल लाखों टन अयस्क जापान को भेजा जाने लगा।
India Japan Relations: आज जब प्रधानमंत्री जापान में सेमीकंडक्टर, दवा, रक्षा,
एनर्जी और रोजगार जैसे क्षेत्रों में समझौते कर रहे हैं, तो यह महज एक व्यापारिक यात्रा नहीं बल्कि पुराने मित्र को भारत के सहयोग की याद दिलाने जैसा है।
बस्तर की यह संपदा कोई नई खोज नहीं है।
मुगल,
अंग्रेज,
निजाम सबकी नजरें इस पर रही हैं।

यहां के आदिवासी अपनी धरती और संसाधनों के लिए लड़े हैं, और इसी संघर्ष से नक्सलवाद जैसी चुनौती भी पैदा हुई। लेकिन इन सबके बीच बस्तर ने राष्ट्रधर्म निभाया है।
India Japan Relations: अंततः, जो राष्ट्र 35 सेकंड की देरी के लिए भी माफी मांगता है,
वह अपने रिश्तों को कितनी गंभीरता से निभाता होगा…
यह सोचकर गर्व होता है कि हमारे बस्तर का लोहा उस रिश्ते की नींव है। प्रधानमंत्री की जापान यात्रा ने इस छुपे हुए योगदान को एक नई पहचान दी है।

