Shri Mahakaleshwar Temple Mp: उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में इस बार होली का उत्सव चंद्र ग्रहण की वजह से समय से पहले मनाया गया, जहां देश के कई हिस्सों में धुलेंडी को लेकर संशय बना रहा। वहीं मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार 3 मार्च मंगलवार की सुबह ही रंगों का त्योहार शुरू हो गया। सुबह 4 बजे भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को रंग लगाया गया और पुजारियों ने हर्बल गुलाल से होली खेली, जिससे पूरा माहौल भक्ति और उल्लास से भर गया।

महाकाल की अनोखी होली परंपरा
महाकाल मंदिर में होली का उत्सव हमेशा से ही अनोखा रहा है। इस बार चंद्र ग्रहण के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए त्योहार को पहले ही मना लिया गया। भक्तों ने भगवान के साथ रंगों का खेल देखकर आनंद लिया।
भस्म आरती में गुलाल की वर्षा
भस्म आरती के दौरान सबसे पहले बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित किया गया। इसके बाद नंदी जी को भी गुलाल चढ़ाया गया और फिर भक्तों पर रंग उड़ाए गए। आरती की शुरुआत हरी ओम जल से अभिषेक से हुई, उसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया। नंदी जी का स्नान, ध्यान और पूजन भी इसी क्रम में संपन्न हुआ।

ग्रहण के कारण मंदिर के पट खुले रहेंगे
चंद्र ग्रहण के चलते धुलेंडी के दिन मंदिर के पट बंद नहीं किए जाएंगे। भस्म आरती से लेकर ग्रहण समाप्ति तक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। हालांकि, सुबह भगवान को नियमित भोग नहीं लगाया जाएगा। ग्रहण के बाद शुद्धिकरण कर भोग अर्पित किया जाएगा। पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि शाम 6:32 से 6:46 बजे तक 14 मिनट का ग्रहण रहेगा, जिसका वेध काल सूर्योदय से शुरू होगा। वेध काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में केवल शक्कर का भोग लगाया जाएगा।

कल से शुरू होगी ठंडे जल की स्नान व्यवस्था
महाकाल मंदिर में साल में 2 बार भगवान की दिनचर्या में बदलाव होता है। इस वर्ष 4 मार्च से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू हो रही है, जिसे गर्मी की शुरुआत माना जाता है। इसी दिन से भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। यह व्यवस्था शरद पूर्णिमा तक जारी रहेगी। इस दौरान प्रतिदिन की पांच आरतियों में से तीन के समय में परिवर्तन होगा। ग्रहण समाप्ति के बाद संध्या आरती नियमित रूप से होगी, और मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करेगा।

