Chaitra Navratri 2nd Day: चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हो चुकी है, आज नवरात्रि का दूसरा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरुप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। उनका व्रत करते है। मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग और साधना की देवी माना जाता हैं, जिनकी उपासना से ज्ञान, धैर्य और सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
ब्रह्मचारिणी नाम के पीछे छिपी कथा
पौराणिक कथा के मुताबिक, मां ब्रह्मचारिणी का जन्म पर्वतराज हिमालय की घर में हुआ था। वो भगवान भोलेनाथ को पति के रुप में पाना चाहती थी, तभी नारद मुनि ने उन्हें कठोर तपस्या करने की सलाह दी। उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की। इस तप की वजह उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा।

बताया जाता है कि, ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप का आचरण करने वाली देवी है। तप के दौरान माता ने केवल फल-फूल ग्रहण किए और जमीन पर रहकर कठोर साधना की। उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर देवताओं ने उन्हें मनोकामना पूर्ति का वरदान दिया, तभी से उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा।
मन्यता है कि, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।
इस दिशा में बैठकर पूजा करना शुभ
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूरे विधि-विधान से पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। मां की पूजा करते समय उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में बैठना शुभ माना जाता है। भक्त का मुख उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। पूजा करते समय मां को सफेद और सुगंधित फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
मां को प्रिय है ये भोग
मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर से बनी मिठाइयां बहुद प्रिय होती हैं। बर्फी का भोग लगाने से मां भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती है।

सूजी या बेसन का हलवा भी मां को अर्पित किया जाता है। इस दिन सफेद रंग को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र
ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:
ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी।
सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते
या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
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