Rishi Panchami snake procession Gariaband: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवरी गांव में ऋषि पंचमी के अवसर पर एक अनोखी और प्राचीन परंपरा का आयोजन किया गया। इस दिन ग्रामीणों ने जहरीले सांपों की शोभायात्रा निकाली, जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाती है। ऋषि पंचमी हिंदू पंचांग के भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है, जो गणेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन आती है। 2025 में यह त्योहार 28 अगस्त को मनाया गया। इस अवसर पर आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालु देवरी गांव पहुंचे, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्साह से भर गया।
परंपरा का महत्व
ऋषि पंचमी का त्योहार मूल रूप से सप्त ऋषियों—कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ—की पूजा के लिए समर्पित है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं इस दिन व्रत रखकर राजस्वला दोष से मुक्ति प्राप्त करती हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के देवरी गांव में यह परंपरा सांप पूजा से जुड़ी हुई है, जो नाग पंचमी की याद दिलाती है। नाग पंचमी श्रावण मास में मनाई जाती है, जबकि ऋषि पंचमी भाद्रपद में। फिर भी, देवरी के ग्रामीणों ने इसे सांपों की पूजा के साथ जोड़ रखा है। परंपरा के अनुसार, सांपों को प्रकृति का अभिन्न अंग मानकर उनकी रक्षा की जाती है। गरियाबंद जिला, जो रायपुर से अलग होकर 2012 में अस्तित्व में आया, प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है।

सांप पकड़ने से लेकर जंगल में छोड़ने तक
देवरी गांव की इस अनूठी परंपरा में ग्रामीण घरों, खेतों और आसपास के क्षेत्रों में मिलने वाले जहरीले सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़ते हैं। यह कार्य विशेषज्ञ ग्रामीणों द्वारा किया जाता है, जो पीढ़ियों से सांपों को पकड़ने की कला सीखते आए हैं। सांपों को पकड़ने के दौरान कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाता, बल्कि विशेष सावधानियां बरती जाती हैं ताकि सांप सकुशल रहें। पकड़े गए सांपों की संख्या इस बार दर्जनों थी, जिनमें कोबरा, रसेल वाइपर जैसी जहरीली प्रजातियां शामिल थीं। छत्तीसगढ़ में सांपों की विविधता अधिक है, और यहां आठ नई प्रजातियों की खोज भी हो चुकी है।
Rishi Panchami snake procession Gariaband: सांपों की शोभायात्रा
पकड़ने के बाद इन सांपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ग्रामीण सांपों को फूल, दूध, चंदन और अन्य प्रसाद अर्पित करते हैं। पूजा के दौरान मंत्रोच्चारण और भजन गाए जाते हैं, जो ऋषि पंचमी के महत्व को रेखांकित करते हैं। उसके बाद शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें सांपों को सावधानीपूर्वक ले जाया जाता है। यात्रा गांव के विभिन्न स्थानों से गुजरती है, जहां लोग जगह-जगह पूजा करते हैं। श्रद्धालु सांपों को देखकर आशीर्वाद लेते हैं और उनकी रक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं। इस शोभायात्रा में महिलाओं की भूमिका विशेष होती है, जो व्रत रखकर भाग लेती हैं। यात्रा के दौरान ग्रामीण युवाओं को सांप पकड़ने की तकनीक सिखाई जाती है, जिसमें सुरक्षित दूरी बनाना, विशेष उपकरणों का उपयोग और सर्पदंश से बचाव के उपाय शामिल हैं। यह शिक्षा ग्रामीणों के लिए जीवनरक्षक साबित होती है, क्योंकि छत्तीसगढ़ जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाएं आम हैं।

सांपों को जंगल में वापस छोड़ना
शोभायात्रा के समापन के बाद सभी सांपों को मूल स्थान या निकटवर्ती जंगल में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया जाता है। यह प्रक्रिया विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि सांपों को कोई हानि नहीं पहुंचाई जाती। ग्रामीणों का मानना है कि यह कार्य प्रकृति के संतुलन को बनाए रखता है। सांप कीटों को नियंत्रित करते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक हैं। इस परंपरा से ग्रामीणों में सांपों के प्रति भय कम होता है और सम्मान बढ़ता है।
नहीं हुई कोई सर्पदंश की घटना
स्थानीय लोगों का कहना है कि सालों से चली आ रही इस परंपरा के दौरान अब तक कोई सर्पदंश की घटना नहीं हुई है। यह दावा आश्चर्यजनक है, क्योंकि गरियाबंद जैसे क्षेत्रों में सांपों की उपस्थिति अधिक है। जितेंद्र सिन्हा जैसे स्थानीय पत्रकारों ने भी इसकी पुष्टि की है कि हजारों लोगों की उपस्थिति में भी कोई हादसा नहीं हुआ। यह परंपरा सर्पदंश से बचाव के लिए जागरूकता फैलाती है। हालांकि, राज्य में सर्पदंश की घटनाएं चिंताजनक हैं; उदाहरणस्वरूप, 2024 में गरियाबंद में ही भाई-बहन की सर्पदंश से मौत हो चुकी है। लेकिन देवरी गांव की यह परंपरा एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करती है।
सांप पकड़ने की शिक्षा
Rishi Panchami snake procession Gariaband: परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सांप पकड़ने की शिक्षा है। ग्रामीण युवा विशेषज्ञों से सीखते हैं कि कैसे जहरीले सांपों को बिना खतरे के संभाला जाए। इसमें लंबे डंडों का उपयोग, दस्तानों का पहनना और त्वरित चिकित्सा शामिल है। यह कौशल न केवल त्योहार के दौरान उपयोगी है, बल्कि दैनिक जीवन में भी सर्पदंश को रोकने में मदद करता है। महिलाएं और बच्चे भी इस शिक्षा से लाभान्वित होते हैं।

