Baglamukhi Jayanti 2026: मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं। इन्हें पीताम्बरा विद्या के नाम से भी जाना जाता है। कृष्ण शुक्ल अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी प्रकट हुई थीं, इसलिए इस दिन बगलामुखी जयंती मनाई जाती है। इस दिन भक्त मां बंगलामुखी के मंदिर जाते हैं। उनकी पूरे विधि विधान से पूजा करते है।
सच्चे मन से पूजा करने पर मिलेगी मां की कृपा
सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से मां बगलामुखी की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मां की कृपा से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है, शत्रु-बाधा से मुक्ति मिलती है, आरोग्य में वृद्धि होती है तथा समस्त बाधाएँ दूर हो जाती हैं।
कब है जयंती?
पंचांग के मुताबिक, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 23 अप्रैल 2026, गुरुवार को रात 8:50 बजे से शुरु होगा और 24 अप्रैल 2026, शुक्रवार को शाम 7:22 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के मुताबिक बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी।

इस तरह करें पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करें और पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर पूजा घर को साफ करें, लकड़ी की चौकी पर पीला आसन बिछाएं। देवी बगलामुखी की प्रतिमा या फोटो स्थापित करें और गंगाजल छिड़कें। देवी को पीले फूल, फल, चंदन, घी का दीपक, धूप आदि अर्पित करें। विधि-विधान से पूजा करें और अंत में बगलामुखी आरती करें। भोग के रूप में बेसन के लड्डू लगाएं। यदि संभव हो तो इस दिन व्रत रखना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।
कैसे हुआ मां का जन्म?
कथा के अनुसार, सतयुग में एक भयंकर तूफान ने सृष्टि को विनाश की कगार पर ला दिया था। भगवान विष्णु चिंतित होकर भगवान शिव की शरण में गए। शिवजी ने बताया कि केवल आदिशक्ति ही इस विनाश को रोक सकती हैं। विष्णुजी ने हरिद्रा सरोवर पर कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से हरिद्रा सरोवर में दिव्य तेज प्रकट हुआ और तभी देवी बगलामुखी प्रकट हुईं।
देवी ने विष्णुजी को वर मांगने को कहा, तो उन्होंने सृष्टि के विनाश को रोकने की प्रार्थना की। मां बगलामुखी ने “तथास्तु” कहकर विनाश रोक दिया और अंतर्ध्यान हो गईं। इसी दिन वैशाख शुक्ल अष्टमी थी, इसलिए इस तिथि पर बगलामुखी जयंती मनाई जाती है।
विशेष मान्यता
श्रद्धा-भाव से विधि-पूर्वक बगलामुखी देवी की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, आरोग्य में वृद्धि होती है और शत्रु-बाधा से मुक्ति मिलती है।
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