Brahma Muhurta Don’ts: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजे से 5:30 बजे तक का पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान जागकर स्नान, योग, ध्यान और प्रार्थना करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। वास्तुशास्त्र, ज्योतिष और आयुर्वेद में भी इस समय को विशेष महत्व दिया गया है। लेकिन शास्त्रों में कुछ कार्यों को इस अवधि में वर्जित बताया गया है।
ब्रह्म मुहूर्त क्या है?
सूर्योदय से ठीक पहले यानी सुबह 4 बजे से 5 बजकर 30 मिनट तक की यह अवधि ब्रह्म मुहूर्त कहलाती है। इस समय वातावरण सबसे शुद्ध, शांत और पवित्र होता है।
कहा जाता है कि, इस समय आसपास का वातावरण सबसे शुद्ध, शांत और पवित्र माना जाता है। ऐसे में ब्रह्म मुहूर्त में जागकर ध्यान, योग, प्रार्थना आदि करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

ब्रह्म मुहूर्त में क्या न करें?
नकारात्मक विचार बिल्कुल न लाएं
ब्रह्म मुहूर्त में मन में कोई भी नकारात्मक विचार आने से बचें। मान्यता है कि इस डेढ़ घंटे के दौरान मन में आने वाले विचार पूरे दिन पर अपना प्रभाव डालते हैं। इस समय मन सबसे शांत होता है, इसलिए नकारात्मक सोच पूरे दिन के फैसलों और मूड को प्रभावित कर सकती है।
क्रोध न करें
शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त को ध्यान और प्रार्थना का समय बताया गया है। इस दौरान क्रोध करना सख्ती से वर्जित है। क्रोध से नकारात्मक ऊर्जा फैलती है, जो पूरे दिन के विचारों और कार्यों पर बुरा असर डाल सकती है।
देर तक न सोएं
ब्रह्म मुहूर्त में देर तक सोना शास्त्रों के अनुसार अच्छा नहीं माना जाता। इस पवित्र अवधि में सोने से व्यक्ति ध्यान, साधना, पूजा-पाठ जैसी उत्तम गतिविधियों से वंचित रह जाता है।ब्रह्म मुहूर्त का समय सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा होता है। इसलिए इस दौरान शांत रहकर, सकारात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें तो पूरे दिन की सफलता और शांति सुनिश्चित होती है।
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