Chaitra Navratri 8th Day: चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन यानी दुर्गाष्टमी पर देवी दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन मां महागौरी को समर्पित है। 26 मार्च को मनाई जा रही महाष्टमी पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। ऐसे में आइए जानते हैं, मां महागौरी की पूजा करने की पूजा विधि, कथा…
महाष्टमी का शुभ रंग
नवरात्रि के आठवें दिन गुलाबी रंग पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह रंग प्रेम, करुणा और सकारात्मकता का प्रतीक है।

मां महागौरी का स्वरुप
माता महागौरी का वर्ण अत्यंत गौर (सफेद) श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, उनका वाहन वृषभ (बैल), इसलिए “वृषारूढ़ा” कहलाती हैं। मां की चार भुजाओं में ये शस्त्र धारण कर रखा है, एक हाथ में त्रिशूल, एक हाथ में डमरु और अन्य दो हाथों में वरमुद्रा और अभयमुद्रा धारण कर रखा है।
क्या है मां महागौरी की कथा?
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव को पाने के लिए मां गौरी ने कठोर तपस्या की, तप के प्रभाव से माता का शरीर काला पड़ गया था, जिसे भगवान शिव ने गंगाजल से स्नान कराकर पुनः गौर वर्ण और दिव्य बना दिया। इसी कारण उनका नाम महागौरी कहा जाता है।

इन चीजों का लगाएं भोग
मां महागौरी को शुद्ध और सात्विक वस्तुएं प्रिय होती है, जैसे- नारियल, पूड़ी, चना, हलवे का भोग चढ़ाना शुभ माना जाता है
ऐसे करें महागौरी की पूजा
महाष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहने। फिर जो व्रत रहते हैं वो महागौरी का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। पहले पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। चौकी स्थापित कर उस पर माता की प्रतिमा या चित्र रखें।

इसके साथ में श्रीगणेश, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवियां) और सप्त मातृका की स्थापना करें। माता को फूल अर्पित करें—विशेष रूप से रात की रानी के फूल प्रिय माने जाते हैं। दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से विधिवत पूजा करें। अंत में भोग अर्पित कर आरती करें। पूजा के दौरान उनकी कथा सुनें और मंत्रों का जाप करें। अंत में मां की आरती उतारकर भोग लगाएं और सभी प्रसाद बाटें।
मां महागौरी के मंत्र
बीज मंत्र
“ॐ देवी महागौर्यै नमः॥”
ध्यान मंत्र
“श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥”
स्तुति मंत्र
“सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते॥”
अष्टमी के दिन कन्या पूजन का महत्व
महाष्टमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है, 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को आमंत्रित करें। उनके चरण धोकर सम्मानपूर्वक आसन दें, कुमकुम, अक्षत से तिलक करें। फिर उन्हें हलवा, पूड़ी और चने का प्रसाद खिलाएं। और उपहार दें। अंत में उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
पूजा के लाभ
मां गौरी की पूजा अगर अविवाहित कन्याएं सच्चे मन से करती है, तो उन्हें मन चाहा योग्य वर की प्राप्ति होती है।
वहीं विवाहित महिलाओं को मां अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देती है। मानसिक, आध्यात्मिक और भौतिक सुखों की प्राप्ति होती हैं, नकारात्मक विचारों का नाश और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां महागौरी की कृपा से जीवन में शांति, सुख और समृद्धि आती है।

