Yashoda Temple Indore: हिंदू धर्म में हर पर्व को धूम-धाम से मनाते है, ऐसे में आज पूरे देश में मां यशोदा जयंती मनाई जाएगी। यह दिन ममता, त्याग और भरोसे का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां यशोदा जयंती के दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से संतान-सुख प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं आपके घर में शांति और रिश्तों में मिठास बनी रहती है। इस दिन इंदौर में बने इकलौते यशोदा मां के मंदिर में भक्तों की काफी भीड़ होती है।

इस मंदिर में खासकर निःसंतान महिलाएं मां यशोदा से संतान प्राप्ति की मनोकामनाएं मांगने आती हैं। कहा जाता है, देश से ही नहीं बल्कि इस मंदिर में विदेश से भी लोग अपनी संतान की कामना लेकर यहां आते हैं। और मां की गोदभराई कर संतान प्राप्ति की कामना करते है।
मां यशोदा के अलावा विराजमान है ये देवी- देवता
इस मंदिर में मां यशोदा की गोद में बालकृष्ण विराजमान है, इनके अलावा बाजू में नंद बाबा की छोटी सी प्रतिमा स्थापित है। यहां श्रीकृष्ण गोवर्धन पर्वत को उगली में लिए राधा और रुक्मणी जी की प्रतिमाओं के साथ विराजमान हैं।

हर गुरुवार होती है गोदभराई
स्थानीय निवासी बताते है कि, इस मंदिर में हर गुरुवार को मां यशोदा की महिलाएं चावल, नारियल, चुनरी और पूजन सामग्री लेकर मां गोद भरती हैं। पुजारी पूरी विधि-विधान के साथ गोद भराई की रस्में पूरी करवाते हैं। ऐसा करने से नि: संतान लोगों को मां संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देती है।
इंदौर शहर में है मां यशोदा का मंदिर
मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के खजूरी बाजार, राजवाड़ा के पास स्थिय है, जहां मां यशोद के गोद में भगवान कृष्ण बालरुप में विराजमान है। कहा जाता है, यह देश का इकलौता यशोदा मंदिर है। जो करीब 220 से 350 साल पुराना है। यहां मां यशोदा जयंती के दिन भक्त देश – विदेश से संतान प्राप्ति की कामना लेकर माता के दर्शन करने आते हैं।

जानिए मंदिर की क्या है मान्यता?
मान्यता है कि, इस मंदिर में निःसंतान महिलाएं यहां मां यशोदा की गोद भराई करके संतान प्राप्ति की कामना करती हैं। और मां यशोदा उनकी सूनी गोद भर देती हैं।
खास बात ये है कि, यहां गोद भराई की रस्म संतान प्राप्ति से पहले की जाती है, जबकि आमतौर पर यह रस्म प्रेगनेंट होने के बाद होती है। इतना ही नहीं जब कोई महिला संतान प्राप्ति की कामना करती है, अगर यह मनोकामना पूरी हो जाती है। तो वो यहां आकर दोबारा मां यशोदा की गोद भराई करते हैं।
कैसे शुरु हुई गोदभराई रस्म की शुरुआत
मंदिर के पुजारी के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण आनंदीलाल दीक्षित ने करवाया था। बताया जाता है कि, उन्होंने राजस्थान के जयपुर से संगमरमर की मूर्तियां बनवाई और फिर इंदौर में मंदिर बनवाकर स्थापित की थीं।
मान्यता है कि, आनंदीलाल को मां यशोदा का सपना आया था कि जो महिलाएं गुरुवार को मां यशोदा की गोद भराई करेंगी। उन्हें संतान की प्राप्ति होगी। तभी से इस मंदिर में गोदभराई की परंपरा चली आ रही है, जिसे लोग आज भी मानते हैं।

