The largest statue of Parashurama Mp: मध्यप्रदेश में तो वैसे कई देवी – देवताओं के मंदिर है, जो अपने आप में अदभुत है, और हर मंदिर में मान्यता और पौराणिक कथाएं छुपी होती है, ऐसे ही मध्यप्रदेश के जबलपुर में परशुराम की एक प्रतिमा पहाड़ी पर स्थित है, जो कि 900 वर्ग फिट क्षेत्रफल वाली पहाड़ी पर विराजमान है। कहा जाता है, यह प्रतिमा विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा है।
इस स्थान पर है ये प्रतिमा
मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर से करीब 25 किलोमीटर से दूर खमरिया के मटामर क्षेत्र में परशुराम की प्रतिमा 900 वर्ग फिट क्षेत्रफल वाली पहाड़ी पर विराजमान है, जिसकी ऊंचाई लगभग 31 फीट है। यह दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक है।
क्या है मान्यता?
बताया जाता है कि, यह प्रतिमा मध्यप्रदेश की ही नही बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी परशुराम की प्रतिमा है। जिनकी ऊंचाई लगभग 31 फीट ऊंची है। और उनके हाथ में धारण किया हुआ फरसे की लंबाई लगभग 15 फीट है। यह प्रतिमा बेहद आकर्षक है, अपने आप में ही बेहद अदभुत है। यह ऊंची पहाड़ी पर विराजमान है।
कहा जाता है यह वहीं स्थान है, जहां परशुराम ने प्रश्चित किया था।

तपस्या से प्रसन्न हुई मां
परशुराम अपने पिता के आज्ञाकारी पुत्र थे, वो उनकी आज्ञा का हमेशा पालन करते थे, तभी एक बार उनके पिता ने उनकी माता रेणुका को ही मारने का आदेश दे दिया। तो उनकी आदेशा का पालन करने के लिए उन्होंने रोते हुए सीने पर पत्थर रखकर अपनी माता पर फरसे से वार किया और उनकी मृत्यु हो गई। जिसके बाद गलती के पश्चाताप के लिए परशुराम इसी पहाड़ी पर परिक्रमा करने आएं, जहां मां नर्मदा उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर वहीं कुंड के रुप में प्रकट हो गई तब से वहां मौजूद कुंद परशुराम के नाम से प्रसिद्ध है।
नहीं पता चल सकी कुंड की गहराई
बताया जाता है कि, सालो पहले परशुराम की तपोस्थली के नजदीक कोई कुंड या नदी नहीं था, लेकिन जब मां नर्मदा कुंड के रुप में प्रकट हुईं तो परशुराम ने अपना कमंडल और लगोंट उस कुंड में छोड़ दिया था। तभी से यहां पानी भरा रहता है, लेकिन आज तक इस कुंड की गहराई नहीं पता चली। यही नहीं बल्कि आज भी पहाड़ी पर परशुराम के पैर के निशान देखने को मिलते है। हर साल इस स्थान पर मेले लगता है।

पूरे शहर का दृश्य यहां से आता है नजर
परशुराम के दर्शन के लिए आप इस स्थान पर पहुंचकर सीढ़ियो से वहां जा सकते हैं, हालांकि भगवान की प्रतिमा इतनी ऊंची है कि नीचे से ही यह पहाड़ी दिखाई देती है, लेकिन जब आप उस पहाड़ में जाते है, तो वहां से पूरे जबलपुर का व्यू नजर आता है। यह पहाड़ी सिर्फ धार्मिक आस्था का ही नही बल्कि प्रकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है।

