Bagdai Vandevi Temple CG: देशभर में जहां देवी-देवताओं को सोना, चांदी, नारियल या प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है, वहीं छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के खमतराई गांव में स्थित बगदाई वनदेवी मंदिर में भक्त देवी को पत्थर चढ़ाते हैं।
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यह परंपरा करीब 100 साल पुरानी है और श्रद्धालुओं का मानना है कि पत्थर का यह चढ़ावा देवी को अत्यंत प्रिय है। कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से पत्थर चढ़ाकर मनोकामना मांगता है, देवी उसकी इच्छा अवश्य पूरी करती हैं।
स्वयंभू हैं बगदाई वनदेवी की प्रतिमा…
स्थानीय निवासी बताते हैं कि बगदाई वनदेवी की प्रतिमा स्वयंभू रूप में प्रकट हुई थी।

किसी को यह नहीं पता कि यह मूर्ति वहां कैसे आई। कहा जाता है कि एक स्थानीय जमींदार को देवी ने स्वप्न में दर्शन दिए, जिसके बाद उन्होंने वहां एक छोटा मंदिर बनवाया। समय के साथ मंदिर का विस्तार हुआ और आज यह लोक आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
भक्तों का अटूट विश्वास और देवी के चमत्कारिक अनुभव…
भक्तों का विश्वास है कि देवी वनदेवी हर सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना को पूरी करती हैं। भक्त रुखमणि वैष्णव बताती हैं, “मैंने पांच पत्थर रखकर देवी से प्रार्थना की थी, और मनोकामना पूरी होने के बाद फिर पत्थर चढ़ाने आई।”
एक भक्त ने बताया कि- “साल 2008 में संतान प्राप्ति की इच्छा से पत्थर चढ़ाए थे, और देवी की कृपा से मुझे बेटा और बेटी दोनों हुए। तब से हर नवरात्रि मैं यहां ज्योति कलश जलवाती हूं।”
नवरात्रि में उमड़ती है भक्तों की भीड़….
हर साल शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। देवी को “वनदेवी” कहा जाता है क्योंकि यह स्थान पहले घने जंगलों से घिरा हुआ था।

स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग एक सदी पहले यहां से गुजरने वाले लोग पांच पत्थर रखकर मनोकामना मांगते थे और सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच जाते थे। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे क्षेत्र में फैल गई और आज भी जारी है।
आस्था और परंपरा का अनोखा संगम…
आज बगदाई वनदेवी मंदिर न केवल बिलासपुर बल्कि आसपास के जिलों में भी श्रद्धा और चमत्कार का प्रतीक माना जाता है।
पत्थर चढ़ाने की यह अद्वितीय परंपरा लोगों की भक्ति, विश्वास और देवी की कृपा का सुंदर संगम है — जो यह बताती है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।

