Bhopali Mahadev: जिले के घोड़ाडोगरी विकासखंड से 15 किलोमीटर दूरी पर सतपुड़ा की वादियों में रानीपुर के पास बसा भोपाली का छोटा महादेव पावन स्थल है। यहां प्राकृतिक रूप से प्रगट भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग है जहां पर प्रतिवर्ष शिवरात्रि व श्रावण मास में जिले भर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते हैं।
छोटे महादेव को लेकर मान्यता है कि भगवान भोले शंकर ने सबसे पहले पचमढ़ी में साधना की इसके उपरांत भोपाली की पावन गुफा मे तपस्या की थी। इस तपस्थली की गुफा में पवित्र जलधारा प्रवाहित होती है।
Bhopali Mahadev: तपस्थली की गुफा में पवित्र जलधारा प्रवाहित होती

रानीपुर निवासी सुरेश चावरे ने बताया कि इस जल का बड़ा महत्व है जो रोग व बीमारियों से निजात दिलाता है। भगवान भोले नाथ के दर्शन करने व अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए दूर-दूर से लोग बैलगाड़ी, साइकिल, बाइक, जीप, बस और ट्रैक्टर आदि से पहुंचते हैं और रात भर रुकते भी हैं।
Bhopali Mahadev: इस जल का बड़ा महत्व
Bhopali Mahadev: मान्यता है कि फसलों पर यदि कोई बीमारी आती है तो इस पावन स्थली से जल ले जाकर किसान अपने खेतों में छिड़काव कर देते हैं तो वह दूर हो जाती है।
किसान अपने खेतों में छिड़काव

महाशिवरात्रि पर भोपाली स्थित छोटे महादेव में विशाल मेला लगता है। भगवान भोले शंकर के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे समाजसेवी संगठनों द्वारा यहां पर आयोजित किए जाते हैं।
किसानों के उपयोगी सामग्री की लगाई
जिससे दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को खाने-पीने की भी समस्या नहीं रहती है। मेले में बड़ी-बड़ी दुकानें भी किसानों के उपयोगी सामग्री की लगाई जाती हैं।
Bhopali Mahadev: सावन माह में उमड़ते हैं भक्त

सावन के महीने में भोपाली स्थित शिवधाम में पूजा अर्चना करने के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है। इस बार भी बारिश होने के कारण गुफा के उपर पर्वत से पानी की तेज धारा झरने के रूप में शिला पर गिरने लगी है।
भंवारा गुफा स्थित शिवधाम में भक्तों की भीड़ लगेगी
इससे वहां का दृश्य बेहद विहंगम हो गया है। सावन के पहले सोमवार को यहां पर भक्तों की भीड़ लगेगी। इसके अलावा बैतूल के सोनाघाटी शिव मंदिर, खेड़ली किला, जटाशंकर, भंवारा गुफा स्थित शिवधाम में भक्तों की भीड़ लगेगी।

