Bastar Naxal surrender: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों के सरेंडर की खबर ने राज्य में राजनीतिक और सुरक्षा जगत में हलचल मचा दी है। डिप्टी मुख्यमंत्री और होम मिनिस्टर विजय शर्मा ने बताया कि पिछले 15 दिनों में कई नक्सली सरेंडर कर चुके हैं और आने वाले 15 घंटों में और भी नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे। यह कदम राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों की रणनीतिक मेहनत का परिणाम है।
सरकार की रणनीति
Bastar Naxal surrender: डिप्टी CM विजय शर्मा ने कहा कि यह प्रक्रिया केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही है। बस्तर में सरकार और सेंट्रल एजेंसियां मिलकर मल्टीडायमेंशनल एरिया में काम कर रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य नक्सलियों को मुख्यधारा में लाना और उनके पुनर्वास को सुनिश्चित करना है।
सरेंडर करने वाले नक्सलियों को रेड कार्पेट वेलकम के साथ मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा। सरकार का कहना है कि न केवल उन्हें सुरक्षा दी जाएगी बल्कि उनके समाज में फिर से शामिल होने और रोजगार पाने के रास्ते भी खुले होंगे।

नक्सलियों का रिहैबिलिटेशन
डिप्टी CM विजय शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों का रिहैबिलिटेशन किया जाएगा। इसमें उन्हें शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की सुविधा दी जाएगी। सरकार ने यह भरोसा दिलाया कि किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होगा और सभी नक्सली मुख्यधारा में पुनः स्वागत किए जाएंगे।
सरेंडर प्रक्रिया से यह भी साफ है कि राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियां नक्सल प्रभावित इलाकों में केवल सुरक्षा बलों के बल पर ही नहीं बल्कि विकास और सामाजिक समावेश के माध्यम से स्थायी शांति कायम करना चाहती हैं।
Bastar Naxal surrender: विकास की दिशा
बस्तर में नक्सलियों के सरेंडर और रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय लोगों को होगा। यह कदम न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा बल्कि क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा।
विजय शर्मा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नक्सलियों को भय और हिंसा से दूर करके उन्हें समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाना है। आने वाले समय में बस्तर क्षेत्र में शांति और स्थायी विकास की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

