Khedla Fort: खेड़ला किला मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में स्थित एक प्राचीन और ऐतिहासिक किला है। यह किला बैतूल शहर से लगभग 5-7 किलोमीटर दूर बैतूल-आमला मार्ग के पास ग्राम खेड़ा में स्थित है।
Khedla Fort: चार प्राचीन गोंड राज्यों में से एक का राजधानी स्थल
इसे राजा ईल ने सन् 1358 के लगभग 650 साल पहले बनवाया था। खेड़ला किला मध्यकालीन दौर का प्रमुख किला था और यह गोंडवाना क्षेत्र के चार प्राचीन गोंड राज्यों में से एक का राजधानी स्थल था।
पारस पत्थर था, जिससे वह लोहे को सोने में बदल देते थे
इस किले का इतिहास गोंड राजाओं से जुड़ा हुआ है, जहां नरसिंह राय जैसे गोंड शासक इस किले पर शासन करते थे। राजा जैतपाल किले के प्रसिद्ध शासकों में से एक थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि उनके पास पारस पत्थर था, जिससे वह लोहे को सोने में बदल देते थे।
Khedla Fort: तो उन्होंने किले पर हमला कर दिया

यह पारस पत्थर का रहस्य आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है। किंवदंती के अनुसार, जब अंग्रेजों को इस बात का पता चला, तो उन्होंने किले पर हमला कर दिया।
कई कोशिशें कीं, लेकिन व्यर्थ रहीं
राजा जैतपाल ने पारस पत्थर को किले से दो किलोमीटर दूर एक तालाब में छुपा दिया था, जो अब भी वहां दफन माना जाता है। अंग्रेजों ने उस तालाब में इस पत्थर को खोजने की कई कोशिशें कीं, लेकिन व्यर्थ रहीं।
हाथी भी आसानी से आ-जा सकते थे

खेड़ला किले के चारों ओर मोटी दीवारें, गहरी खाई और गुप्त मार्ग हैं। कहा जाता है कि किले में प्रवेश के तीन रास्ते थे और एक गुप्त सुरंग खेड़ा किले को अचलपुर किले से जोड़ती थी, जहां हाथी भी आसानी से आ-जा सकते थे।
खुदाई भी कई बार हुई,
तालाब के बीच जलमग्न एक सूर्य मंदिर है, जिसकी खुदाई भी कई बार हुई, लेकिन मंदिर के धंसे होने के कारण पूरी तरह निकल पाना मुश्किल रहा।
Khedla Fort: रहस्य आज भी लोगों में जिज्ञासा पैदा करते
यह किला न केवल स्थापत्य कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहाँ की दीवारों और खंडहरों में इतिहास की गूंज सुनाई देती है। किले से जुड़ी अनेक कहानियां और रहस्य आज भी लोगों में जिज्ञासा पैदा करते हैं।
आज भी लोगों में जिज्ञासा पैदा करते हैं

स्थानीय लोग मानते हैं कि इस किले में अभी भी बेसुमार खजाना छुपा हुआ है, जिसे कोई आज तक खोज नहीं पाया।
आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके
खेड़ला किला आज पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है, लेकिन इसे और बेहतर संरक्षण और प्रचार की आवश्यकता है ताकि इसका ऐतिहासिक महत्व आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।
बैतूल जिले के गौरव के रूप में जाना जाता
यह किला मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा है और बैतूल जिले के गौरव के रूप में जाना जाता है।
खेड़ला किले से जुड़ी प्रमुख राजाओं की सूची और उनके कालखंड इस प्रकार हैं:
1. राजा ईल (1358 के आसपास) – खेड़ला किले के निर्माता माने जाते हैं। उन्होंने इस किले का निर्माण कराया था।
2. राजा हरदेव (1365) – ईल वंश के छठे राजा, जो किले पर शासन कर रहे थे। उनके समय में महात्मा मुकुंदराज स्वामी भी हुए।
3. नरसिंह राय (1398) – गोंड वंश के पहले ज्ञात शासक, जिन्होंने खेड़ला का राज्य बड़ा किया और मलवा तक फैला दिया। उन्होंने कई मुस्लिम शासकों से युद्ध किया।
4. राजा जैतपाल – नरसिंह राय के बाद का प्रसिद्ध राजा, जिनके पास पारस पत्थर से लोहे को सोने में बदलने का कथित अद्भुत शक्ति था।
5. राधोजी भोंसले – मुगल साम्राज्य के पतन के बाद इस किले पर कब्जा कर शासन किया।
6. अंग्रेजों ने 1818 में सीताबर्डी की लड़ाई के बाद इस किले को भोंसले से कब्जा लिया।
खेड़ला किला मध्यकालीन भारत के एक महत्वपूर्ण गढ़ के रूप में माना जाता है, जिसका शासन काल 14वीं से 19वीं सदी तक रहा।
इसके राजाओं ने अपने समय में युद्ध,

शासन और सांस्कृतिक योगदान दिया। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, पारस पत्थर के रहस्य ने इस किले की प्रसिद्धि और भी बढ़ाई।

