Navratri Kanya Pujan Significance: इन दिनों शारदीय नवरात्रि का त्योहार चल रहा है, चारो तरफ नवरात्रि की धूम है, जगह – जगह पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई हैं। 9 दिनों तक माता रानी की विशेष रुप से पूजा की जाती है। इन दिनों 1- 12 साल तक हर कन्या को देवी का स्वरुप माना जाता है। और नवरात्रि के किसी भी एक दिन कन्याओं को माता का स्वरुप मानकर उनकी पूजा करते हैं। और उनको अपने घर या मंदिर में भोजन कराते हैं। लेकिन क्या आप जानते है कन्या पूजन क्यों किया जाता हैं?
क्यों किया जाता है कन्या पूजन?
कन्या पूजन नवरात्रि के दौरान किया जाने वाला महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, वैसे तो जिस लड़की की शादी नहीं होती उन सबको ही कन्या माना जाता है, लेकिन विशेष रुप से 2 से 12 साल तक की हर कन्याओं को देवी का स्वरुप मानकर पूजन किया जाता है। इस दौरान कन्याओं को आदरपूर्वक आमंत्रिक किया जाता है, फिर उनके पैर धोते हैं, और उनके मांथे पर तिलक लगाया जाता है, फिर पारंपरिक भोजन जैसे- पूड़ी , हलवा, केले और चने का भोग खिलाया जाता है।

पूजा के अंत में कन्याओं को दक्षिणा और उपहार देकर विदा किया जाता है। मान्यता है कि कन्या पूजन करने से घर-परिवार में सुख – समृद्धि आती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
कन्याओं के रुप और उनके महत्व…
कन्याओं की पूजा करने से घर की दरिद्रता दूर होती है। जीवन में आ रही कठिनाइयां दूर हो जाती हैं। कन्या पूजन से सभी विघ्न और बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।

कन्या पूजन मे लांगुर का विशेष महत्व…
नवरात्रि में जब कन्या भोजन कराते हैं, तो 9 कन्याओं को देवी के रुप में पूजते हैं और एक लड़के को भी लागुंर के रुप में भोजन कराया जाता है। लागुंर को भैरव या हनुमान जी का स्वरुप माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस प्रकार भैरव बाबा मां दुर्गा के पहरेदार होते हैं, उसी प्रकार कन्या पूजन में लांगुर को शामिल करने का विशेष महत्व होता हैं। लांगुर के बिना कन्या पूजन अधूरा माना जाता है।
कैसे करें कन्यापूजन?
कन्या पूजन करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरुरी है।
- 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करें।
- उनके पैर धोकर आसन पर बिटाएं और उनके माथे पर तिलक लगाएं।
- पारंपरिक भोग- पूरी, हलवा और चना खिलाएं।
- पूजा के बाद उपहार और दक्षिणा दें।
- कन्याओं के चरण स्पर्श करके उनका आर्शीवाद लें।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा के दौरान कन्याओं के प्रति मन में पूर्ण सम्मान और श्रद्धा होनी चाहिए। किसी भी प्रकार का अपमान नहीं करना चाहिए।

