मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में स्थित जामसांवली हनुमान मंदिर न केवल एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, बल्कि यह स्थान भक्तों की गहरी आस्था और चमत्कारी घटनाओं के कारण पूरे भारत में विख्यात है।
इस मंदिर का कोई स्पष्ट रूप से दर्ज ऐतिहासिक लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है, लेकिन शासकीय दस्तावेजों और स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, यह मंदिर 100 वर्षों से भी अधिक पुराना है।
JamSanwli Hanuman Temple: चमत्कारी मूर्ति और स्थानीय मान्यता

इस मंदिर में विराजमान हनुमान जी की मूर्ति को स्वयंभू माना जाता है, अर्थात यह प्रतिमा किसी इंसान द्वारा स्थापित नहीं की गई बल्कि यह धरती से स्वयं प्रकट हुई है।
कहा जाता है कि प्रारंभ में यह मूर्ति खड़ी अवस्था में थी,
लेकिन गुप्त धन की खोज में कुछ लोगों ने जब इस प्रतिमा को हटाने का प्रयास किया तो वह स्वतः लेट गई।
इसे चमत्कारी स्थल माना जाने लगा

इसके बाद उसे 20 बैल और घोड़ों के प्रयासों के बाद भी हिलाया नहीं जा सका। यह घटना लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी और तभी से इसे चमत्कारी स्थल माना जाने लगा।
पौराणिक महत्व

JamSanwli Hanuman Temple: रामायण काल से जुड़ी एक मान्यता के अनुसार, जब भगवान हनुमान संजीवनी बूटी लेकर लंका जा रहे थे, तब उन्होंने जामसांवली के एक पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम किया था।
इसी स्थान पर बाद में यह मंदिर विकसित हुआ। इस मान्यता ने इस स्थान को और भी अधिक पावन और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है।
मंदिर की अनोखी विशेषताएं

JamSanwli Hanuman Temple: नाभि से जल निकलना: यह मंदिर एक चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है…यहां हनुमान जी की मूर्ति की नाभि से निरंतर जल निकलता है। यह जल भक्तों द्वारा प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
मानसिक रोगों में लाभकारी
JamSanwli Hanuman Temple: ऐसी गहरी मान्यता है कि इस मंदिर में आने वाले मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति, इस जल को ग्रहण कर या यहां पूजा-अर्चना करके आराम और शांति पाते हैं। कई लोगों ने इससे जुड़े अनुभव भी साझा किए हैं।
जामसांवली हनुमान मंदिर केवल एक पूजास्थल नहीं बल्कि चमत्कार, पौराणिक मान्यताओं और भक्ति का संगम है।
यहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं, और इसे एक आस्था की जीवंत मिसाल के रूप में देखा जाता है। यह मंदिर भक्तों के लिए आस्था, चमत्कार और शांति का केंद्र बन चुका है।
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