Why is Satyanarayana Worshipped: सनातन धर्म में भगवान विष्णु तो वैसे कई नाम है। इसमें से एक नाम बेहद प्रसिद्ध है, जो सत्यनारायण रुप में विश्वभर में प्रचलित है। कई श्रद्धालु श्रीहरि सत्यनारायण का व्रत करते है। और उनकी कथा भी सुनते हैं। ज्यादातर पूर्णिमा और गुरुवार के दिन लोग सत्यानारायण की कथा करवाते है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु के लिए व्रत रखते हैं। लेकिन क्या आप जानते है इस व्रत की शुरुआत कैसे हुई। अगर नहीं तो आइए हम इस आर्टिकल के जरिए आपको बताते हैं।
सुख-शांति के लिए सुनते है सत्यनारायण की कथा
सनातन धर्म में कहा जाता है। भगवन सत्यानारायण की पूरी विधि -विधान से पूजा करने और व्रत रखने से घर में सुख – शांति बनी रहती है।
भगवान विष्णु को ही सत्यनारायण कहते है। सत्यनारायण नाम दो शब्दों से मिलकर बना होता है। पहला सत्य और दूसरा नारायण इसमें से ‘सत्य -जिसका अर्थ है सच, जो आदि और अनंत है। वहीं नारायण का अर्थ जो जगत के पालनहार विष्णु हैं।

इसका सरल अर्थ है- सत्य ही नारायण है। इस पूजा का मुख्य संदेश यही है कि संसार में सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है और जो सत्य बोलते हैं और सत्यता की राह पर चलते है। उन पर भगवान सत्यनारायण की कृपा होती है।
जानिए कैसे शुरु हुई सत्यनारयण की पूजा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवर्षि नारद घूमते हुए मृत्युलोक (पृथ्वी) आ पहुंचे। यहां उन्होंने देखा कि मनुष्य अपने-अपने कर्मों की वजह से बहुत दुख और पीड़ा से ग्रसित और परेशान हैं। यह देखकर नारद मुनि को मनुष्यों की चिंता होने लगी और वो व्याकुल होकर सीधे क्षीर सागर में भगवान विष्णु के पास पहुंच गए और उन्होंने पालनहार श्री हरि से प्रार्थना की और कहा – ‘हे प्रभु, पृथ्वी पर लोग बहुत दुखी हैं। क्या कोई ऐसा सरल उपाय है, जिससे उनके सभी कष्ट दूर हो जाएं?’
जग के पालनहार श्रीहरि ने नारद मुनि से कहा-
‘हे नारद, जो मनुष्य सांसारिक सुखों को भोगना चाहता है और मृत्यु के बाद मोक्ष की इच्छा रखता है, उसे सच्चे मन से सत्यनारायण का व्रत और पूजन करना चाहिए। इस व्रत से कलयुग भक्तों को दुखो से छुटकारा मिलेगा।

बताया जाता है कि- काशी के एक बहुत ही गरीब ब्राह्मण शतानंद ने सबसे पहले यह व्रत किया था। तब भगवान नारायण ने स्वयं एक वृद्ध ब्राह्मण का रूप धरकर उन्हें यह कथा सुनाई और पूजा करने की विधि बताई थी। इसके बाद में एक गरीब लकड़हारे ने भी इस पूजा को देखा और सत्य का संकल्प लिया, जिससे उसकी गरीबी दूर हो गई। उसके जीवन में सुख – समृद्धि आती है।
सत्यनारायण कथा का क्या है महत्व?
- मान्यता है कि, सत्यनारायण का व्रत करने और कथा को सुनने मात्र से जीवन के दुखों का नाश होता है और घर में सुख – समृद्धि होती है।
- विवाह, संतान प्राप्ति या गृह प्रवेश के समय सत्यनारायण की पूजा अवश्य करें। इससे घर में सुख – शांति बनी रहती है।
- सत्यनारायण का व्रत और पूरी विधि-विधान से की गई पूजा मनुष्य को झूठ और अधर्म के मार्ग से हटाकर सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा देती है।
इस पूजा में बनता है विशेष प्रसाद
सत्यनारायण का व्रत रखते समय ध्यान रखे पंजीरी (भुना हुआ आटा और चीनी), मीठी पूरी ( गेंहू के आटे में गुड़ का घोल, कालीमिर्च डालकर आटालगाकर उसकी पूरियां बनाए), केले के फल और पंचामृत का विशेष महत्व होता है। इसका भोग लगाना बेहद शुभ माना जात है।
बताया जाता है कि- ‘कथा के बाद प्रसाद ग्रहण किए बिना जाना अधूरा माना जाता है, क्योंकि यह भगवान के प्रति श्रद्धा और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है।’

