Santaneshwar Mahadev Temple Varanasi: भगवान शिव की नगरी काशी में एक ऐसा मंदिर है, जहां निसंतान दंपत्ति को संतान की प्रप्ति होती है। यह मंदिर संतानेश्वर महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां भगवान के दर्शन करने और सच्ची आस्था के साथ पूजा करने से भगवान संतान सुख का आशीर्वाद देते हैं। विशेष रुप से निसंतान दंपत्ति इस मंदिर में अहोई अष्टमी के दिन आते हैं।
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कब है अहोई अष्टमी ?
इस बार अहोई अष्टमी का पर्व 13 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह दिन विशेष रुप से उन माताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिनकी कोई संतान नहीं होती अपितु जो निसंतान होती है। वो इस दिन निर्जला व्रत रखती है। माता गौरी और भगवान शंकर की पूरी विधि – विधान से पूजा करती है। और संतान प्राप्ति या जिनकी संताने हैं उनकी लंबी आयु की कामना करती है।

इस पर्व के दिन संतानेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
काशी में विराजमान हैं संतानेश्वर महादेव…
यह मंदिर वाराणसी के प्रसिद्ध कालभैरव मंदिर के पास में ही स्थित है। कहा जाता है कि भगवान शंकर यहां संतानेश्वर महादेव के रुप में विराजमान हैं- जो भक्तों को संतान सुख और जीवन की बाधाओं से मुक्ति का वरदान देते हैं।
मान्यता है कि जो दंपत्ति संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं या अपने बच्चों के जीवन में आई कठिनाइयों को दूर करना चाहते हैं, वे यहां आकर सच्ची श्रद्धा से पूजा करें तो उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
पूजा विधि और परंपरा…
इस मंदिर में भक्त भगवान शंकर को दूध, दही, जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं। सोमवार और महाशिवरात्रि के दिन विशेष पूजा – अभिषेक किया जाता है। मंदिर को फूलों से सजाया जाता है और भक्त महादेव का रुद्राभिषेक करते हैं।

कहा जाता है कि यहां पूजा करने वाले हर श्रद्धालु को संतान प्राप्ति या संतान से जुड़ी हर मनोकामना की पूर्ति होती है।
मंदिर से जुड़ी मान्यताएं…
संतानेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण का कोई सटीक प्रमाण नहीं है, लेकिन इसके पीछे प्रचलित कथा है।
कहा जाता है कि एक निसंतान दंपत्ति ने इसी स्थान पर भगवान शिव की घोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें पुत्र रत्न का आशीर्वाद दिया। तभी से इस स्थान पर भगवान शंकर को संतानेश्वर महादेव के रुप में पूजा जाने लगा।
हर मनोकामना होती है पूरी…
संतानेश्वर महादेव मंदिर आज भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालु मानते हैं कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां पूजा करते है। उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है – चाहे वह संतान की प्राप्ति की हो या जीवन की किसी अन्य अभिलाषा की।
Note – The information in this article is based on traditional beliefs and scriptures. It is meant only for general awareness. We do not claim authenticity of any personal faith or ritual. Readers are advised to consult their family traditions or spiritual guide before following any religious practice.

