Mankeshwari Devi Temple Raigarh: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में शरद पूर्णिमा के दिन मानकेश्वरी देवी मंदिर में एक अनोखी परंपरा देखने को मिली। ग्रामीणों ने मंदिर में मानकेश्वरी देवी की पूजा-अर्चना करते हुए 40 बकरों की बलि दी। इस परंपरा का आयोजन करीब 500 साल से लगातार होता आ रहा है। बलि और खून पीने की यह अनोखी रस्म इस बार भी जारी रही, और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

बलि और खून पीने की परंपरा
मानकेश्वरी देवी के भक्तों के अनुसार, इस दिन बैगा का शरीर देवी का निवास स्थल बन जाता है। बलि देने के बाद बैगा बकरों का खून पीता है और ऐसा करने के बावजूद उसके शरीर में कोई साइड इफेक्ट नहीं दिखाई देता। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह शक्ति और आस्था का प्रतीक है।
बल पूजा के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया जाता है। महिलाएं अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए नारियल लेकर मंदिर में आती हैं और पूजा-अर्चना में हिस्सा लेती हैं।

Mankeshwari Devi Temple Raigarh: निशा पूजा
मानकेश्वरी देवी की पूजा शरद पूर्णिमा की रात से एक दिन पहले निशा पूजा के रूप में होती है। इस पूजा में राज परिवार की ओर से बैगा के अंगूठे में एक ढीली अंगूठी पहनाई जाती है।

अंगूठी की परंपरा
अंगूठी बैगा के नाप की नहीं होती। बलि पूजा के दौरान अंगूठी अपने आप कस जाती है, जो यह संकेत देता है कि देवी का वास अब बैगा के शरीर में हो गया है। इसके बाद श्रद्धालु बैगा के पैर धोते हैं और सिर पर दूध डालकर पूजा करते हैं।
इस विधि के बाद बैगा का शरीर देवी का निवास बन जाता है और वह बकरों का खून पीता है।
श्रद्धालुओं की भागीदारी
मंदिर में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु आते हैं। सभी लोग इस परंपरा और अनुष्ठान को देखने और उसमें भाग लेने के लिए मंदिर पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन की पूजा और बलि से सर्वशक्ति देवी का आशीर्वाद मिलता है और उनके जीवन की समस्याएं दूर होती हैं।
मानकेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास
मानकेश्वरी देवी मंदिर की स्थापना चक्रधर सिंह के परिवार ने की थी। यह मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। मंदिर में होने वाली बलि और पूजा परंपरा को पीढ़ियों से संरक्षित रखा गया है।
मंदिर का यह अनुष्ठान धार्मिक आस्था का प्रतीक है और स्थानीय लोगों के जीवन में इसे विशेष महत्व दिया जाता है।
बल पूजा का महत्त्व
Mankeshwari Devi Temple Raigarh: बल पूजा में बैगा की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उन्हें देवी का माध्यम माना जाता है और उनकी पूजा के दौरान बकरों का खून पीने की रस्म का धार्मिक महत्व है।

बल पूजा की प्रक्रिया
- निशा पूजा के बाद बैगा का शरीर देवी का निवास बन जाता है।
- बकरों की बलि दी जाती है और खून पीने की रस्म पूरी होती है।
- श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं और देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
महिलाएं अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए नारियल और अन्य सामग्री लेकर आती हैं।

