Punganur calf born in CG: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में पहली बार कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) की तकनीक से पुंगनूर नस्ल की मादा वत्स (बछिया) का सफलतापूर्वक जन्म हुआ है। यह सफलता पशु विज्ञान और पशु चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों के लिए एक बड़ा उपलब्धि मानी जा रही है। उनका कहना है कि इस उपलब्धि के बाद पुंगनूर गायों का संरक्षण और संवर्धन अब अधिक तेजी और वैज्ञानिक तरीके से किया जा सकेगा।
बछिया के जन्म की खबर जैसे ही इलाके में फैली, उसे देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। दुनिया की सबसे छोटी गाय मानी जाने वाली इस नस्ल के प्रति लोगों में उत्सुकता और बढ़ गई है, क्योंकि इसी नस्ल की गाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास भी है।

दुनिया की सबसे छोटी गाय
पुंगनूर गाय दुनिया की सबसे छोटी नस्लों में गिनी जाती है। इसकी औसत ऊंचाई 70 से 90 सेंटीमीटर होती है, जबकि वजन 115 से 200 किलोग्राम तक होता है। आकार में भले ही यह गाय छोटी होती है, लेकिन इसके दूध को अत्यंत गुणकारी माना गया है।
मुख्य रूप से यह नस्ल आंध्र प्रदेश में पाई जाती है, लेकिन लोकप्रियता और मांग बढ़ने के कारण अब पूरे देश में लोग इसे पालने लगे हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पुंगनूर गाय की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद इसकी मांग में कई राज्यों में तेजी आई है।

Punganur calf born in CG: जशपुर में कैसे हुई सफलता?
जानकारी के मुताबिक, जशपुर जिले के गोंढ़ीकला और ग्राम करमीटिकरा–करूमहुआ क्षेत्र में 1 नवंबर को पुंगनूर नस्ल की बछिया ने जन्म लिया। बछिया के मालिक का नाम खगेश्वर यादव है।
खगेश्वर बताते हैं कि उन्होंने पहली बार पुंगनूर गाय प्रधानमंत्री मोदी के पास देखी थी। इसके बाद उन्होंने अपनी देशी गाय में कृत्रिम गर्भाधान कराकर इस नस्ल की ब्रीडिंग कराने का फैसला लिया।
पशु चिकित्सा विभाग और तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग से यह प्रयोग सफल रहा, जिसकी वजह से छत्तीसगढ़ में पहली बार पुंगनूर बछिया ने जन्म लिया। यह उपलब्धि राज्य में पशुपालन को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

पुंगनूर गाय से जुड़ी मान्यताएं
Punganur calf born in CG: पुंगनूर गाय को लेकर आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत में कई धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं। हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित समुद्र मंथन की कथा में कहा गया है कि अमृत प्राप्ति से पहले कई दिव्य वस्तुएं निकली थीं, जिनमें से एक सुरभि या कामधेनु गाय थी।
आंध्र प्रदेश के लोग मानते हैं कि आज की पुंगनूर गाय वही दिव्य सुरभि गाय का स्वरूप है। मान्यता है कि उस समय इसकी ऊंचाई लगभग दस फीट थी, जो समय के प्रभाव से घटकर छोटी हो गई।
वैदिक कथाओं के अनुसार, विश्वामित्र ने ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को हड़पने के लिए युद्ध किया था, लेकिन वशिष्ठ की कामधेनु ने अपनी शक्ति से उनकी रक्षा की और विश्वामित्र पराजित हुए।
इसी गाय के दूध से तिरुपति बालाजी का अभिषेक किया जाता है, जिसे क्षीराभिषेकम कहा जाता है।

