Lord Shiva Dhatura: हिंदू धर्म में हर भगवान शिव को देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, और योगियों के आदिनाथ के रुप में जाना जाता है। वे सृष्टि के संहारक हैं और अपने नाम की तरह ही भोले हैं। इसलिए भक्तों को अत्यंत प्रिय देवता हैं। महादेव को सोमवार का दिन अर्पित है लेकिन उनकी शिवरात्रि और सावन में विशेष रुप से पूजा की जाती है।
भगवान शिव की पूजा करते समय शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करते हैं। इसमें से धतूरा एक विषैला फल है लेकिन भगवान शिव को अति प्रिय लेकिन क्या आप जानते है उन्हें धतूरा क्यों चढ़ाया जाता है। आइए आज हम इस आर्टिकल में आपको बताएंगे की भगवान शिव को धतूरा क्यो चढ़ाते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार…
धतूरा चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है, कहा जाता है जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, उस समय हलाहल विष उत्पन्न हुआ। यह विष इतना प्रबल था कि पूरी सृष्टि को खत्म कर सकता था।
ब्रम्हांड की रक्षा के लिए पिया विष…
तभी भगवान शिव ने समस्त ब्रम्हांड की रक्षा के लिए इसे पी लिया और अपने कंठ में रोक लिया। इसलिए भगवान शिव की गर्दन नीली दिखाई देती हैं, और उन्हें नीलकंठ भी कहा जाता है।
हलाहल विष अत्यंत तीव्र और गर्म प्रभाव वाला था, शिव को शांत रखने के लिए भक्तों ने जल, दूध, भांग, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करना शुरु किया गया।

धतूरा विषैला लेकिन फायदेमंद…
धतूरा एक विषैला पौधा है। लेकिन इनकी पत्तियों का इस्तेमाल औषधीय के रुप में भई किया जाता है। भगवान शिव को इसलिए चढ़ाया जाता है, क्योकि यह विष का प्रतीक माना जाता है।

शिव का औघड़ रुप और धतूरा…
भगवान शिव को औघडंनाथ भी कहते हैं, यानी वे सरल और सहज वस्तुओं को आसानी से स्वीकार कर लेते हैं। धतूरा एक ऐसा फल है, जिसे सामान्य लोग नहीं खाते और जिसे अशुद्ध माना जाता है।
शिव का वैराग्य पूर्ण और तात्विक स्वरुप यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति दिखावे में नहीं बल्कि भावना और समर्पण में होती है। धतूरा अर्पित करके भक्त यह संदेश देता है कि आप पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव को कुछ भी अर्पित करों भगवान शिव उसे स्वीकार कर लेते हैं, चाहें वह विषैला ही क्यों न हो।
तांत्रिक साधना में धतूरे का विशेष महत्व…
भगवान शिव को तंत्र और योग के अधिपति भी कहा जाता है, इनकी पूजा करते समय भगवान का प्रिय फल धतूरा भी अर्पित करते हैं, क्योंकि इसे नकारात्मक ऊर्जा को सोखने और शक्ति केंद्रित करने वाला माना जाता है।
धतूरे चढ़ाने का आध्यात्मिक संदेश…
भगवान शिव को धतूरा चढ़ने का एक आध्यात्मिक अर्थ भी है कहा जाता है कि भक्त अपने भीतर के दोष, क्रोध, लोभ और ईर्ष्या जैसे विष शिव को अर्पित कर सकते हैं। शिव इन विषों को अपने अंदर समाहित कर उन्हें शांत कर देते हैं। इससे भक्त शुद्ध हो जाते हैं।
Note – The information in this article is based on traditional beliefs and scriptures. It is meant only for general awareness. We do not claim authenticity of any personal faith or ritual. Readers are advised to consult their family traditions or spiritual guide before following any religious practice.

