Paithu traditions: भारत में लिव इन रिलेशनशिप को लेकर अक्सर विवाद और चर्चाएं होती रहती हैं। इसे समाज में कुछ लोग गलत मानते हैं, तो कुछ इसे आधुनिक रूप में देखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ट्राइबल समुदायों में लिव इन रिलेशनशिप को न केवल स्वीकार किया जाता है बल्कि इसे प्रोत्साहित भी किया जाता है? ऐसी ही एक प्रथा है पैठू प्रथा, जो खासकर कुछ आदिवासी इलाकों में प्रचलित है।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि पैठू प्रथा क्या है, इसका इतिहास क्या है, यह कहां प्रचलित है और इसे लेकर समाज का नजरिया कैसा है।
पैठू प्रथा क्या है?
यह एक पारंपरिक आदिवासी प्रथा है जिसमें एक लड़की अपनी मर्जी से किसी लड़के के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह सकती है। इसमें परिवार और समाज का समर्थन भी मिलता है। इसे पश्चिमी देशों के आधुनिक लिव इन रिलेशनशिप से अलग इसलिए माना जाता है क्योंकि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसमें सामाजिक मान्यता होती है।

पैठू प्रथा में रिश्तों की विशेषताएं
- स्वैच्छिक संबंध: लड़की और लड़का दोनों की सहमति से रिश्ता तय होता है।
- सामाजिक स्वीकृति: परिवार और समुदाय इस संबंध को मान्यता देते हैं।
- लंबी अवधि का संबंध: यह सिर्फ अस्थायी या अनुचित संबंध नहीं होता, बल्कि अक्सर लंबे समय तक चलता है।
- विवाह का विकल्प: पैठू प्रथा में शादी जरूरी नहीं होती; यदि दोनों चाहें तो बाद में विवाह भी कर सकते हैं।
Paithu traditions: पैठू प्रथा का इतिहास
पैठू प्रथा का उद्भव मुख्य रूप से भारत के पूर्वोत्तर और मध्य भारतीय आदिवासी इलाकों में हुआ। यह प्रथा उन समुदायों में विकसित हुई जहां सामाजिक स्वतंत्रता और महिला की आज़ादी को अधिक महत्व दिया जाता था।
ऐतिहासिक अध्ययन बताते हैं कि पैठू प्रथा तब शुरू हुई जब आदिवासी समाज में विवाह के औपचारिक नियम इतने कड़े नहीं थे। लड़कियों को अपने साथी चुनने की स्वतंत्रता दी जाती थी और समुदाय यह मानता था कि खुशहाल और स्वैच्छिक संबंध ही मजबूत रिश्तों की नींव रखते हैं।

प्रथा का महत्व
- समानता और स्वतंत्रता: यह प्रथा लड़कियों को सामाजिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता देती है।
- समाज में पारदर्शिता: संबंध को छिपाने की जरूरत नहीं होती।
- दोनों की मर्जी: जब दोनों की मर्जी से रिश्ता तय होता है, तो यह लंबे समय तक टिकता है।
पैठू प्रथा कहां प्रचलित है?
पैठू प्रथा मुख्य रूप से भारत के कुछ आदिवासी इलाकों में प्रचलित है।
- झारखंड: संथाल और मुंडा समुदायों में पैठू प्रथा का चलन देखा गया है।
- छत्तीसगढ़: गोंड आदिवासियों में लड़की और लड़के का स्वैच्छिक संबंध सामान्य माना जाता है।
- ओड़िशा: कुछ आदिवासी समूहों में यह प्रथा आज भी जीवित है।
- मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्र: यहाँ भी पैठू प्रथा देखने को मिलती है।
इन क्षेत्रों में पैठू प्रथा का पालन सामाजिक नियमों और परंपराओं के अनुसार होता है।
पैठू प्रथा और आधुनिक समाज
Paithu traditions: आज के समय में, जब लिव इन रिलेशनशिप को लेकर बहस और विवाद बढ़ रहे हैं, पैठू प्रथा एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में सामने आती है। यह दिखाती है कि अगर संबंध स्वैच्छिक और पारदर्शी हों, तो समाज और परिवार भी उनका समर्थन कर सकते हैं।
पैठू प्रथा के बारे में गलतफहमियां
- अनैतिक संबंध: कई लोग इसे गलत समझते हैं, लेकिन आदिवासी समाज में इसे नैतिक और स्वीकार्य माना जाता है।
- समाज विरोधी: यह प्रथा समाज को कमजोर नहीं बनाती बल्कि रिश्तों को स्थायित्व देती है।
- शादी का विकल्प नहीं: पैठू प्रथा में शादी संभव है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं होती।

