Lingeshwari Mata Cave Temple: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड के ग्राम आलोर के पहाड़ों के बीच स्थित लिंगेश्वरी माता की गुफा रहस्य और आस्था का संगम मानी जाती है। इस गुफा के द्वार साल में केवल एक बार खुलते हैं, जब हजारों की संख्या में श्रद्धालु संतान प्राप्ति और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यहां पहुंचते हैं।
भाद्रपद नवमी के बाद खुलता है द्वार
फरसगांव विकासखंड से बड़े डोगर मार्ग पर लगभग 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ग्राम आलोर, और आलोर से आगे झांटीबंध पारा में करीब 3 किलोमीटर पर लिंगेश्वरी माता का पवित्र स्थान है। हर साल भाद्रपद महीने की नवमी तिथि के बाद आने वाले पहले बुधवार को इस गुफा का द्वार खोला जाता है।

द्वार खुलने के दिन यहां का दृश्य बेहद अद्भुत होता है। भक्त माता के दर्शन से पहले रेत में बने निशानों को देखने पहुंचते हैं। यही निशान क्षेत्र के आने वाले वर्ष के शुभ-अशुभ संकेत माने जाते हैं। पुजारी इन पदचिह्नों को देखकर पूरे साल की भविष्यवाणी करते हैं, उसके बाद श्रद्धालुओं को गुफा में प्रवेश दिया जाता है।
आस्था की अनोखी परंपरा
इस मंदिर की एक अनोखी परंपरा यह है कि गुफा को बंद करने से पहले अंदर रेत बिछाई जाती है और द्वार को सील कर दिया जाता है। जब अगले वर्ष यह द्वार खोला जाता है, तो रेत पर बने प्राकृतिक निशान देखकर भविष्य का अनुमान लगाया जाता है।
- कमल के फूल के निशान दिखाई देने पर धन-संपत्ति में वृद्धि का संकेत माना जाता है।
- हाथी के पांव के निशान दिखने पर क्षेत्र में अन्न-धन की प्रचुरता मानी जाती है।
- घोड़े के खुर के निशान मिलने पर युद्ध या कला से संबंधित घटनाओं की संभावना मानी जाती है।
- बिल्ली के पैर के निशान भय या अनिष्ट का संकेत होते हैं।
- बाघ के निशान जंगली जानवरों के आतंक का प्रतीक माने जाते हैं।
- वहीं मुर्गी के पैर के निशान दिखें तो अकाल का संकेत माना जाता है।
इन्हीं निशानों के आधार पर क्षेत्र का वार्षिक कैलेंडर तय किया जाता है।

Lingeshwari Mata Cave Temple: माता लिंगेश्वरी की कथा
लोककथाओं के अनुसार, एक समय कमार जाति का एक शिकारी शिकार की तलाश में आलोर के जंगलों में भटक रहा था। तभी उसे एक छोटा खरगोश दिखाई दिया। शिकारी ने धनुष में बाण चढ़ाकर खरगोश का पीछा किया, पर वह एक सुरंगनुमा बिल में घुस गया। जब शिकारी उसे बाहर नहीं निकाल सका, तो उसने बिल को पत्तों से बंद कर दिया और गांव लौट आया।
अगले दिन जब वह कुछ ग्रामीणों के साथ वापस लौटा, तो उस स्थान पर खरगोश के बजाय पत्थर से निर्मित एक लिंगाकार आकृति दिखाई दी। सभी ने उस स्थान को देवी का रूप मानकर पूजा-अर्चना शुरू कर दी।
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स्वप्न में मिला आदेश
कहा जाता है कि उसी रात गांव के एक व्यक्ति को स्वप्न में माता ने दर्शन देकर आदेश दिया —
“भाद्रपद नवमी के बाद आने वाले बुधवार को मेरी सेवा करो, मैं तुम्हारी हर मन्नत पूरी करूंगी।”
यह बात पूरे गांव में फैल गई और लोगों ने अपनी मनोकामनाएं लेकर माता से प्रार्थना की। आश्चर्यजनक रूप से उनकी इच्छाएं पूरी होने लगीं। तब से लेकर आज तक यह परंपरा चली आ रही है और अनगिनत निःसंतान दंपतियों को संतान प्राप्ति का सुख मिला है।
दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
Lingeshwari Mata Cave Temple: लिंगेश्वरी माता की गुफा के दर्शन के लिए न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से भी भक्त हर साल आते हैं। कई लोग नंगे पैर पैदल यात्रा कर माता के दरबार पहुंचते हैं। श्रद्धालु यहां मन्नत के रूप में नारियल, चुनरी और प्रसाद चढ़ाते हैं।
भक्तों का विश्वास है कि माता लिंगेश्वरी देवी सच्चे मन से की गई हर प्रार्थना सुनती हैं और उनके द्वार पर आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।

