Rules of Wearing Rudraksha: सनातन धर्म में रुद्राक्ष को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है। यह भगवान भोलेनाथ का प्रतीक माना जाता है। इसे धारण करने से व्यक्ति आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक रुप से सशक्त बन जाता है।
बता दें कि, रुद्राक्ष दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ – ‘रुद्र’ अर्थात् भगवान शिव और ‘अक्ष’ अर्थात् आंखों से गिरा आंसू। मान्यता है कि रुद्राक्ष भगवान शिव के आंसुओ से उत्पन्न हुआ था।
जानिए रुद्राक्ष का आध्यात्मिक महत्व
सनातन शास्त्रों में रुद्राक्ष को भगवान शिव का वरदान माना गया है। इसे धारण करने से व्यक्ति के भीतर एक विशेष प्रकार की ऊर्जा का संचार होता है, जो उसे ध्यान, साधना और भक्ति की ओर ले जाता है।

- एकाग्रता – ध्यान साधना में लगे लोग रुद्राक्ष की माला का उपयोग करते हैं जिससे मानसिक शांति मिलती है।
- आध्यात्मिक उन्नति – जो लोग आत्म-साक्षात्कार की ओर बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए रुद्राक्ष मार्गदर्शक का कार्य करता है।
- नकारात्मकता से सुरक्षा – माना जाता है कि रुद्राक्ष बुरी नजर, तंत्र-मंत्र और बुरे विचारों से सुरक्षा प्रदान करता है।
सेहत के लिए रुद्राक्ष लाभदायक
आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययनों ने भी यह साबित किया है कि रुद्राक्ष धारण करने से शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं –
- रुद्राक्ष शरीर में विद्युत चुंबकीय तरंगें उत्पन्न करता है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है।
- रुद्राक्ष से निकलने वाली ऊर्जा मस्तिष्क की तरंगों को शांत करती है, जिससे तनाव और घबराहट कम होती है।
- इसे पहनने से व्यक्ति में उत्साह, सक्रियता और ऊर्जा बनी रहती है।

रुद्राक्ष के प्रकार और उनके लाभ
रुद्राक्ष को उसके मुखी के आधार पर विभाजित किया गया है। हर मुखी का अलग अर्थ और लाभ होता है। आइए कुछ प्रमुख रुद्राक्षों को समझें…
एक मुखी रुद्राक्ष
- भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है।
- अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली।
- इसे पहनने से आध्यात्मिक जागरूकता और ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति होती है।
- उच्च पदों पर बैठे लोगों के लिए श्रेष्ठ।
पांच मुखी रुद्राक्ष
- सबसे सामान्य और व्यापक रूप से प्रयोग में आने वाला रुद्राक्ष।
- इसे “कालाग्नि” कहा जाता है और यह स्वास्थ्य, बुद्धि और एकाग्रता को बढ़ाता है।
- छात्रों, कर्मचारियों और योग साधकों के लिए फायदेमंद।
सात मुखी रुद्राक्ष
1. महालक्ष्मी को समर्पित।
2. इसे धारण करने से धन, समृद्धि और करियर में उन्नति मिलती है।
नौ मुखी रुद्राक्ष
दुर्गा के नव रूपों का प्रतीक।
यह भय, रोग और मानसिक तनाव को दूर करता है।

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष
- भगवान शिव के 11 रुद्र रूपों का प्रतिनिधित्व करता है।
- पहनने से साहस, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की शक्ति में वृद्धि होती है।
- न्यायाधीश, वकील, अधिकारी वर्ग के लिए श्रेष्ठ।
इस तरह से रुद्राक्ष को धारण
- रुद्राक्ष को पहनने से पहले उसे गंगाजल से शुद्ध करें।
- सोते समय या शौचालय में न पहनें।
- हर सोमवार को रुद्राक्ष की पूजा करें।
- गुरु या योग्य व्यक्ति से मंत्र सिद्ध करवा कर पहनना चाहिए।

