Kaliadev Village: मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में एक बेहद अनोखा गांव है, जो अपनी रहस्यमयी परंपराओं के कारण चर्चा में रहता है। कालियादेव गांव,
जो इछावर तहसील मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है, वहां के लोग मानते हैं कि वे भूतों से संवाद करते हैं और अपनी परेशानियां भी बताते हैं। यह सुनने में अविश्वसनीय लग सकता है, लेकिन स्थानीय लोग इसे वर्षों से निभाते आ रहे हैं।
Kaliadev Village: हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा होते

यहां हर भूतड़ी अमावस्या को एक विशेष मेला लगता है, जिसे देखने और अनुभव करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इस मेले में हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं।
लोगों का मानना है कि इस दौरान कुछ लोगों पर आत्माएं या भूत सवार हो जाते हैं और वे उनके माध्यम से बोलते हैं। इन भूतों से संवाद करते समय लोग उनसे मिठाई, पान या अन्य चीजों की मांग भी सुनते हैं,
और साथ ही उन्हें अपनी समस्याएं और मन की बातें भी बताते हैं।
Kaliadev Village: खूबसूरत झरना और छोटा मंदिर

कालियादेव गांव सीप नदी के किनारे स्थित है और पास ही एक खूबसूरत झरना और छोटा मंदिर है, जहां मां काली, भगवान हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां विराजमान हैं। मंदिर के नीचे एक गहरा कुंड है…
जिसमें सीप नदी का जल गिरता है।
इसे पाताल लोक का प्रवेश द्वार भी माना जाता है।
हर साल पितृ मोक्ष अमावस्या पर यहां विशाल रात्रि मेला लगता है, जिसमें एक लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं।
लोगों का विश्वास है कि जो लोग किसी भूत-प्रेत बाधा या मानसिक परेशानी से ग्रसित होते हैं, वे यहां स्नान करके और पूजा-अर्चना कर ठीक हो सकते हैं। यही कारण है कि अमावस्या और पूर्णिमा जैसे पर्वों पर भी यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं।
गांव की एक और खासियत है कि यह कृषि प्रधान है। यहां के किसान मेहनत से खेती कर समृद्ध हुए हैं।
कुछ किसानों ने अपने पक्के मकान बना लिए हैं और खुद के साधन भी खरीद लिए हैं। साथ ही, यह गांव शिक्षा के क्षेत्र में भी पीछे नहीं है। कई युवा सरकारी नौकरियों में चयनित होकर गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।
Kaliadev Village:कालियादेव न सिर्फ अपने रहस्यमय मेलों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक भी बन चुका है।

