उज्जैन स्थित काल भैरव मंदिर भारत के सबसे प्राचीन और रहस्यमयी मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान भैरव को समर्पित है, जो भगवान शिव के आठ रूपों (अष्ट भैरव) में से एक माने जाते हैं।
Kal Bhairav Temple: काल भैरव कहा जाता

भगवान भैरव को समय का अधिपति अर्थात “काल” कहा गया है, इसलिए उन्हें काल भैरव कहा जाता है। यह मंदिर उज्जैन के शिप्रा तट पर स्थित है और माना जाता है कि इसका निर्माण राजा भद्रसेन ने करवाया था, जो अवंति (प्राचीन उज्जैन) के राजा थे।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने ब्रह्मा के अहंकार को नष्ट करने के लिए अपने स्वरूप से भैरव को उत्पन्न किया था। तब से भैरव को “काल” अर्थात मृत्यु और समय का स्वामी माना जाने लगा।
तांत्रिक उपासना का प्रमुख केंद्र

उज्जैन का यह मंदिर भैरव साधना और तांत्रिक उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
Kal Bhairav Temple:इस मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यहां भगवान को मदिरा (शराब) का प्रसाद चढ़ाया जाता है। भक्तजन विभिन्न प्रकार की शराब भगवान काल भैरव को अर्पित करते हैं,
और आश्चर्यजनक रूप से माना जाता है कि मूर्ति स्वयं वह शराब पी लेती है। यह रहस्य सदियों से वैज्ञानिकों और श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय रहा है।
विशाल मेले का आयोजन
मंदिर की भित्तियों पर नवमी शताब्दी के मालवा कालीन चित्रकारी और स्थापत्य कला के दर्शन होते हैं। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं, विशेष रूप से कालाष्टमी और महाशिवरात्रि पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है।
आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण माना जाता
Kal Bhairav Temple: काल भैरव मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हिंदू संस्कृति में समय, मृत्यु और न्याय के देवता के रूप में भगवान भैरव की महिमा का प्रतीक भी है। यह स्थान आज भी श्रद्धा, रहस्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण माना जाता है।

