Gwalior Markandeshwar Temple: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर में स्थित मार्कंडेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धा और आस्था का एक अनोखा प्रतीक है। यह मंदिर 350 से भी अधिक पुराना माना जाता है और इसकी पहचान शिववभक्तों के अलावा उन श्रद्धालुओं के बीच भी विशेष है, जो यमराज की पूजा कर जीवन-मृत्यु से जुड़े भय से मुक्ति की कामना करते हैं। ग्वालियर के लक्ष्मण तलैया क्षेत्र में स्थित यह मंदिर शहर के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है।
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मार्कंडेय ऋषि की कथा से जुड़ी मान्यता…
इस मंदिर के नाम में पीछे एक प्रेरक कथा जुड़ी है। मान्यता अनुसार, मार्कंडेय ऋषि भगवान के अनन्य भक्त थे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार उनका जीवन केवल 16 वर्ष का था, जब उनकी आयु पूरी होने पर यमराज उन्हें लेने आए, तब मार्कंडेय ने पूरे विश्वास और समर्पण से शिवलिंग को पकड़ लिया और भगवान से मृत्यु से बचाने की प्रार्थना की।

मार्कंडेय की भक्ति प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने यमराज को रोक दिया। उसी समय भोलेनाथ ने मार्कंडेय को दीर्घायु का आशीर्वाद दिया और यमराज को पीछे हटना पड़ा। इसी घटना के बाद यह शिवलिंग मार्कंडेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
यमराज की अनोखी स्थापना…
मार्कंडेश्वर मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव के साथ यमराज की भी पूजा की जाती है। स्थानीय निवासी के अनुसार, सिंधिया राजवंश के समय एक संत राव तेमक ने यहां यमराज की प्रतिमा की स्थापना करवाई थी। उन्हें यह सलाह दी गई थी कि यदि वे संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी करना चाहते हैं, तो मंदिर का निर्माण करवाएं। मंदिर बनवाने के बाद उनकी में मनोकामना पूर्ण हुई, और तभी से यहां यमराज की पूजा की परंपरा शुरु हुई।

क्यो की जाती है यमराज की पूजा?
कहावत है कि “जन्म और मृत्यु सत्य हैं’। लोगों का मानना है कि यमराज की पूजा से मृत्यु के भय से छुटकारा मिलता है और मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक की यात्रा में आने वाली परेशानिओं से मुक्ति मिलती है।

भक्तो का मानना है कि व्यक्ति से जीवन में जाने- अनजाने पाप हो जाते हैं। माना जाता है कि यमराज की कृपा से पापों के प्रभाव कम होते हैं और आत्मा स्वर्ग की प्राप्ति कर सकती है।
मकर संक्रांति और नरकचतुर्दशी पर विशेष पूजा…
मार्कंडेश्वर मंदिर में वर्ष भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है, लेकिन मकर संक्रांति और नरकचतुर्दशी पर यहां दूर – दूर से लोग दर्शन और पूजा करते है।

मान्यता है कि इन दिनों पूजा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति को अकाल मृत्यु तथा यम यातना से मुक्ति मिलती है। इस दिन मंदिर में तेल अभिषेक, हवन और रुद्राभिषेक किया जाता है।
काले चढ़ावे की परंपरा…
कहते हैं कि मकर संक्रांति के दिन दान- पुण्य का विशेष महत्व होता है। इस अवसर पर मंदिर में भक्त काला चढ़ावा अर्पित करते हैं, जिसमें काले तिल, उड़द की दाल, काला कपड़ा, कंबल, छाता, जूते – खड़ाऊं और डंडा चढ़ाया जाता है। इसके साथ ही गुड़, सरसों का तेल, शक्ति भोग प्रसाद, तिल की गजक और चांदी अर्पित करना शुभ माना जाता है।

