Ratanpur Maa Mahamaya Temple: छत्तीसगढ़ में वैसे तो बहुत मंदिर है, लेकिन बिलासपुर जिले के रतनपुर में एक ऐसा मंदिर है, जहां आदिशक्ति कौमारी शक्तिपीठ के रुप में विराजमान हैं। इस मंदिर में काल भैरव भगवान देवी महामाया की स्वयं रक्षा करते हैं। यहां भूत-प्रेत, जादू-टोना और प्रेत बाधा से तुरंत छुटकारा मिलता है।

स्तानीय लोगों की मान्याता है कि, काल भैरव के दर्शन के बिना महामाया के दर्शन पूर्ण नहीं माने जाते।
महामाया के दर्शन से पहले जरूरी हैं काल भैरव के दर्शन
मुख्य मंदिर पहुंचने से थोड़ा पहले सिद्ध तंत्र पीठ श्री काल भैरव मंदिर है, जो शक्तिपीठ का प्रवेश द्वार भी है। मान्यता है कि, सती माता का दाहिना स्कंध यहीं गिरा था। उसी समय से काल भैरव रक्षक बनकर स्थापित हो गए। इसलिए हर भक्त पहले भैरव नाथ के दर्शन करने जाते हैं। उसके बाद मां कौमारी महामाया के दर्शन करने जाते है।

मंदिर परिसर की खूबसूरती
मंदिर मुख्य मार्ग पर स्थित है। विशाल प्रांगण में एक पवित्र कुंड है, जिसमें कमल के फूलों की भरमार रहती है। पूरा परिसर बेहद सुंदर और शांतिमय है। शक्तिपीठ दर्शन के लिए आने वाला हर श्रद्धालु पहले इस कुंड के पास रुककर आगे बढ़ता है।

भैरव मूर्ति का रोचक इतिहास
स्थानीय निवासी बताते हैं कि, काल भैरव की प्रतिमा पहले खुले चबूतरे पर विराजमान थी। बाद में बाबा ज्ञानगिरी गोसाई ने भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। आज यह 10 फीट ऊंची रौद्र रूप वाली मूर्ति दुष्टों के नाश और भक्तों की सुरक्षा के लिए प्रसिद्ध है। प्राचीन काल में यहां सिद्ध योगी और तांत्रिक साधना करते थे।

सभी मनोकामनाएं पूरी, कष्टों का अंत
शक्तिपीठ और काल भैरव के दर्शन से शिव-पार्वती की अपार कृपा प्राप्त होती है। सभी प्रकार के कष्ट, जादू-टोना, भूत-प्रेत दोष दूर हो जाते हैं और भक्तों की हर मुराद पूरी होती है।

