Bhagoriya fair: आदिवासी अंचल के प्रमुख पर्व भगोरिया पर जुलवानियां में हजारों की संख्या में आदिवासी समाज की उपस्थिति के बीच सांस्कृतिक उत्साह और राजनीतिक घोषणाओं का संगम देखने को मिला। कैबिनेट मंत्रियों के साथ नागलवाड़ी कृषि कैबिनेट बैठक के बाद कार से जुलवानियां भगोरिया हाट उत्सव में पहुंचे। प्रदेश में आज अंतिम भोगरिया हाट है। आज प्रदेश भर में आदिवासी क्षेत्र में जगह-जगह भगोरिया भर रहा है। यह पर्व होली से सात दिन पहले शुरू होकर होली के दिन समाप्त होता है और आदिवासी समाज की पहचान है।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को किया तीर-कमान भेंट
आज अंतिम भोगरिया हाट पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव कैबिनेट के साथ जिले के जुलवानियां भगोरिया उत्सव में शामिल हुए। यहां पर उन्होंने सबसे पहले आदिवासी समाजजन के साथ भगोरिया उत्सव पर कैबिनेट मंत्रियों के साथ नृत्य किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री का जनजातीय समाज एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया। उन्हें जनजातीय संस्कृति के प्रतीक स्वरूप तीर-कमान भेंट किया गया,और प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्प-गुच्छ देकर अभिनंदन किया।
Bhagoriya fair: भगोरिया को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का लिया निर्णय
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने भगोरिया जैसे पारंपरिक उत्सव को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का निर्णय लिया है। यह सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और भावनाओं का प्रतीक है। जनता के हित में जो भी मांगें आई हैं, उन्हें पूरा किया जाएगा। सरकार आदिवासी अंचल के विकास को प्राथमिकता दे रही है।उन्होंने इस मौके पर कहा कि भगोरिया पर्व जनजातीय संस्कृति,प्रेम और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
जनजातीय संस्कृति और सामाजिक स्नेह का जीवंत उत्सव-मुख्यमंत्री
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फाल्गुन मास के रंगों, मांदल की थाप और जीवन-प्रेम की उमंग से सराबोर भगोरिया पर्व जनजातीय संस्कृति और सामाजिक स्नेह का जीवंत उत्सव है, जिसे प्रत्यक्ष रूप से शामिल होकर ही पूरी तरह महसूस किया जा सकता है।
Bhagoriya fair: “जनजातीय पहचान को मजबूत करने का प्रतीक”
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह पर्व जनजातीय संस्कृति, प्रेम और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। पारंपरिक लोकधुनों, नृत्य और उल्लासपूर्ण वातावरण ने पूरे क्षेत्र को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा ऐसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। विरासत को विकास की राह पर आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ इस पर्व को गरिमा और भव्यता के साथ मनाया गया,जो राज्य सरकार की संवेदनशील सोच और जनजातीय पहचान को मजबूत करने का प्रतीक है।

