Pandrum Cafe Bastar Rehabilitation: छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बस्तर जिले में एक अनोखी पहल शुरू की गई है। पुलिस लाइन स्थित त्रिवेणी परिसर के सामने पंडुम कैफे बस्तर का पहला ऐसा कैफेटेरिया बन गया है, जहां नक्सल पीड़ित परिवारों और समर्पित नक्सलियों को रोजगार देकर उनके जीवन को नई दिशा देने की कोशिश की जा रहाी है। यह कैफे बस्तर प्रशासन और सरकार की पुनर्वास नीति का उदाहरण बनकर सामने आया है।
परिवर्तन की नई इबारत
बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सालों तक हिंसा और भय का माहौल रहा। लेकिन अब विष्णु सरकार की नई योजनाओं और पुनर्वास कार्यक्रमों ने इस क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन की नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है। पंडुम कैफे इसी बदलाव का प्रतीक बन गया है, जहां रोजगार के साथ आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन का अवसर मिल रहा है।

Pandrum Cafe Bastar Rehabilitation: सरकार की पुनर्वास नीति
CG सरकार की पुनर्वास नीति के तहत बस्तर के समर्पित नक्सलियों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें। आड़ावाल स्थित पुनर्वास केंद्र में लगभग 30 सरेंडर नक्सली होटल मैनेजमेंट कोर्स कर रहे हैं। इसके अलावा कई पूर्व नक्सलियों को टूरिस्ट गाइड बनाने की तैयारी जारी है। यह पहल न केवल उन्हें रोजगार दे रही है, बल्कि नया आत्मविश्वास भी पैदा कर रही है।
Read More: छत्तीसगढ़ में सिंचाई क्षमता बढ़ाने की बड़ी पहल: 14 नई परियोजनाओं को मिली मंजूरी
15 नक्सल पीड़ित और नक्सलियों को रोजगार
इसी क्रम में पंडुम कैफे की शुरुआत की गई है, जहां 15 नक्सल पीड़ित और समर्पित नक्सलियों को रोजगार दिया गया है। सभी युवाओं को कैफे प्रबंधन, किचन कार्य, सर्विस और संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। यह प्रशिक्षण उन्हें आत्मनिर्भर बनने के साथ समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

युवाओं को जोड़ा जाए
Pandrum Cafe Bastar Rehabilitation: सरकार और प्रशासन का प्रयास है कि आने वाले दिनों में और भी युवाओं को इस पहल से जोड़ा जाए, ताकि रोजगार के अवसरों का विस्तार हो सके। पंडुम कैफे जैसे मॉडल पूरे बस्तर में पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करेंगे और युवाओं को हिंसा के रास्ते से दूर रखते हुए बेहतर भविष्य की ओर ले जाएंगे।
बस्तर में शुरू हुई यह पहल न केवल रोजगार का अवसर है, बल्कि यह शांति, विकास और स्थायी बदलाव की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम भी है।

