Ashta Mata Mandir Seoni: मध्यप्रदेश के सिवनी जिले से 40 किलोमीटर दूर बरघाट तहसील में स्थित आष्टा माता मंदिर अपनी अनूठी स्थापत्य शैली और रहस्यमय कथा के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर 13वीं सदी के हिमांदपंथी स्थापत्य शैली में बना हुआ है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित धरोहरों में शामिल है। यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि कला, आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम है।
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स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, आष्टा मंदिर का निर्माण देवी मां की कृपा से एक ही रात में हुआ था। कहा जाता है कि रातभर में बड़े-बड़े पत्थरों से मंदिर का निर्माण अपने आप होता जा रहा था। लेकिन जैसे ही लोगों की नजर उस पर पड़ी और मुर्गे की बांग सुनाई दी, निर्माण कार्य उसी क्षण रुक गया। आज भी मंदिर परिसर के आसपास बड़े-बड़े पत्थरों की अधूरी शिलाएं बिखरी पड़ी हैं, जो उस चमत्कारिक कथा की साक्षी हैं।

इतिहासकारों के अनुसार यादव राजाओं ने कराया था निर्माण…
इतिहासकारों के मुताबिक, 13वीं सदी में देवगिरी के यादव राजाओं का शासन इस क्षेत्र तक फैला हुआ था। यादव राजा महादेव और रामचंद्र के मंत्री हिमांद्रि ने इस क्षेत्र में वास्तुकला की विशेष शैली से 100 से अधिक मंदिरों का निर्माण करवाया था।
इनमें से 8 मंदिर आष्टा गांव में बनाए गए, जिसके कारण इस स्थान का नाम पड़ा ‘आष्टा’ — अर्थात 8 मंदिरों का समूह। हालांकि समय के साथ अधिकांश मंदिर ध्वस्त हो गए, पर बचे हुए मंदिरों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संरक्षित रख रहा है।
स्थापत्य कला का बेजोड़ उदाहरण….
आष्टा मंदिर अपनी अद्भुत शिल्पकला के लिए भी जाना जाता है।
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मंदिर पूरी तरह चौकोर पत्थरों की जुड़ाई से बना है, जिन्हें लोहे और शीशे की छड़ों से जोड़ा गया है ताकि संरचना मजबूत और संतुलित रहे।

मंदिर का गर्भगृह ऊपर की ओर संकरा होता गया है, जिससे इसका शिखर अत्यंत भव्य और आकर्षक बन गया है। मंदिर के शीर्ष पर बना ‘आमलक’ (गोलाकार आकृति) इसकी प्राचीनता और शिल्प सौंदर्य का प्रतीक है।
उत्तरमुखी मां काली की प्रतिमा…
मंदिर के गर्भगृह में अलग से मूर्ति नहीं है, बल्कि पिछली दीवार से सटी हुई उत्तरमुखी मां काली की दस भुजाओं वाली पाषाण प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।
कहा जाता है कि मां काली की दिव्य उपस्थिति यहां साधकों को आत्मिक शांति और शक्ति का अनुभव कराती है।
नवरात्र में उमड़ता है भक्तों का सैलाब….
हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां भव्य मेला आयोजित किया जाता है। देशभर से हजारों श्रद्धालु जंवारे और मनोकामना ज्योति कलश लेकर यहां पहुंचते हैं।

पूरे नौ दिनों तक माता की आराधना, भजन-कीर्तन और अखंड ज्योति का आयोजन होता है, जब सैकड़ों कलश एक साथ विसर्जन के लिए निकलते हैं, तो यह दृश्य अद्भुत और आस्था से भर देने वाला होता है।
जीर्णोद्धार कार्य जारी…
पुरातत्व विभाग की देखरेख में मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य दो वर्षों से जारी है।
विभाग के प्रभारी R.K. सोनी के अनुसार, यह प्रयास किया जा रहा है कि मंदिर के प्राचीन स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए इसकी संरचना को मजबूत बनाया जाए।
आस्था और इतिहास का संगम…
आष्टा माता मंदिर न केवल सिवनी जिले का गौरव है, बल्कि यह मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रतीक है।
जैसे भोजेश्वर महादेव मंदिर अपने अधूरे निर्माण के लिए प्रसिद्ध है, वैसे ही आष्टा माता मंदिर भी रहस्य, श्रद्धा और स्थापत्य कौशल का अनोखा मिश्रण है

